– जनवरी-अगस्त में 156 लोगों की मौत, हादसे 15% और घायलों की संख्या 11% घटी
नागपुर :- शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बीच वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में कमी दर्ज की गई है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच नागपुर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 27% की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से महाराष्ट्र में सड़क हादसों में मौतों की कमी के मामले में नागपुर दूसरे स्थान पर रहा, जबकि अकोला में 28% की गिरावट दर्ज की गई।
राज्य स्तरीय दुर्घटना आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-अगस्त 2026 के दौरान नागपुर में 711 सड़क हादसे हुए, जिनमें 156 लोगों की मौत हुई और 728 लोग घायल हुए। वहीं, वर्ष 2025 की इसी अवधि में 840 हादसे, 213 मौतें और 817 घायल दर्ज किए गए थे। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस साल हादसों की संख्या में 15%, मौतों में 27% और घायलों की संख्या में 11% कमी आई है। आठ महीनों में कुल 129 कम सड़क हादसे और 57 कम मौतें दर्ज की गईं।

आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की मुहिम
हादसों में कमी के पीछे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और नागपुर ट्रैफिक पुलिस की ओर से चलाए जा रहे यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा अभियानों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरटीओ (शहर) के किरण बिडकर के नेतृत्व में यातायात नियमों के पालन को लेकर विभिन्न अभियान चलाए गए। वहीं, डीसीपी (ट्रैफिक) आदित्य मिर्खेलकर के मार्गदर्शन में ट्रैफिक पुलिस ने गश्त और कार्रवाई तेज की।
हादसों के प्रमुख कारणों से जुड़े यातायात उल्लंघनों पर विशेष ध्यान देते हुए ऑपरेशन यू-टर्न सहित कई अभियान चलाए गए। दुर्घटना संभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, वाहनों की जांच करने और यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके साथ ही आरटीओ की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, ऑटो-रिक्शा चालकों और स्कूल बस संचालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। हेलमेट रैली, वॉकाथॉन, स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सुरक्षित यातायात व्यवहार का संदेश दिया गया।
दो वर्षों से गिरावट का सिलसिला:
नागपुर में सड़क हादसों के आंकड़ों में पिछले दो वर्षों से कमी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2024 में शहर में 1,255 सड़क हादसे और 345 मौतें दर्ज हुई थीं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा घटकर 1,153 हादसे और 270 मौतें रह गया।








