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इंडक्शन चूल्हे की डिमांड

– नए-नए विकल्प अपना रहे लोग

नागपुर :- गैस एजेंसियों को डिमांड के मुताबिक आपूर्ति नहीं मिल रही है. इसका असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है. बुकिंग के बावजूद गैस सिलेंडर की वेटिंग चल रही है. उपभोक्ताओं ने अब गैस का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है. इसे देखते हुए लोग जहां इंडक्शन चूल्हा खरीदने लगे हैं, वहीं गांवों में मिट्टी के चूल्हों का दौर एक बार फिर वापस लौट आया है. विक्रेताओं के अनुसार इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में पिछले तीन दिनों में पांच गुना की बढ़ोत्तरी हो गई है. पहले 300 से 400 के बीच प्रतिदिन इंडक्शन चूल्हा बिकते थे. अब संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई है. अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए हमले के बाद से हार्मूज जलडमरू में जहाज चलने बंद हो गए हैं. वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बाधित है, इसका असर स्थानीय स्तर पर पड़ रहा है.

बढ़ती किल्लत के बीच लोगों ने गैस की बचत को लेकर उपाय करने शुरू कर दिए है. सिविल लाइंस की रंजना बताती है कि छोटे-छोटे उपाय करके गैस की बड़ी बचत की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि रोटी सेंकने में तवा और लौ दोनों का प्रयोग न करें. सिर्फ तवे पर रोटी सेंकने से गैस की बचत होती है. बताया, दाल हो या फिर चावल, कुछ देर भिगोने के बाद पकाएं. इससे सामग्री जल्दी पक जाती है. पोषण वैल्यू भी बढ़ती है.

गैस सिलेंडरों की बढ़ती वेटिंग लोगों को चिंता में डाल रही है. इससे परेशान लोगों ने गैस के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं. एक उपभोक्ता ने बताया कि उनके घर में गैस चूल्हे पर सिर्फ रोटी बनती हैं. दाल, सब्जी, चावल आदि इंडक्शन पर ही पकाया जा रहा है. इससे सिलेंडर तीन महीने तक चल जाएगा. तब तक दूसरा सिलेंडर मिल ही जाएगा. वहीं व्यापारियों के अनुसार इंडक्शन चूल्हे के बिक्री करीब पांच गुणा बढ़ गई है. अधिकांश लोग कम ऊर्जा खपत के चूल्हे खरीद रहे हैं. उनमें चलाने में गैस के बराबर ही खर्चा आता है. बताया डेढ़ से दो हजार इंडक्शन चूल्हे प्रतिदिन बिक रहे हैं. इसमें अगर आनलाइन खरीदारी को शामिल कर दिया जाए तो संख्या और भी बढ़ जाएगी.


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