नागपुर :- राज्य में प्रोफेसर भर्ती की स्थिति और बेरोजगार उच्च शिक्षित युवाओं की दुर्दशा लगातार गंभीर होती जा रही है. नेट-सेट, पीएचडी जैसी उच्च योग्यताएं प्राप्त करने के बावजूद हजारों प्रोफेसरों को कॉन्ट्रैक्ट यानी घंटा-आधारित प्रणाली पर बेहद कम मानधन में काम करना पड़ रहा है. चिंता की बात यह है कि यह मानधन भी उन्हें समय पर नहीं मिल पाता. इस अस्थिर और अपमानजनक व्यवस्था के कारण कॉन्ट्रैक्ट प्रोफेसरों में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है, जिसका दुष्परिणाम अब जानलेवा साबित हो रहा है. प्राध्यापक पदभर्ती महासंघ द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य में तनाव के कारण आठ कॉन्ट्रैक्ट प्रोफेसरों की हार्ट अटैक या उससे जुड़े कारणों से मृत्यु हो गई. इससे पहले भी कुछ प्रोफेसरों द्वारा अत्यधिक मानसिक दबाव और निराशा के चलते आत्महत्या किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ये घटनाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती हैं. महासंघ के अनुसार वर्ष 2024 में जिन प्रोफेसरों की मृत्यु हुई, उनमें वर्धा जिले के प्रो. विजय नवघरे और गोंदिया जिले के प्रो. वी. एम. गोंडाने शामिल हैं. इसके अलावा, महासंघ ने वर्ष 2024 से पहले मृत हुए 10 प्रोफेसरों की सूची भी सरकार को सौंपी है, जिनमें कुछ मामलों में आत्महत्या की पुष्टि हुई है, महासंघ के संयोजक प्रो. शिवराज पाटिल ने बताया कि नागपुर विभाग में वर्तमान में 1,992 प्रोफेसर विभिन्न अनुदानित कॉलेजों में घंटा-आधार पर कार्यरत हैं.
पीएचडी के बावजूद मिल रहा कम मानधन, सालभर में 8 प्रोफेसरों की मौत


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