– वडेट्टीवार का मंत्रियों पर तीखा हमला, ‘वोट नहीं तो फंड नहीं’ की धमकी पर बवाल
नागपुर :- चुनाव प्रचार में किसी भी तरह का लालच दिखाना आचार संहिता का उल्लंघन है.. यहां सरकार के मंत्री नगर पालिकाओं और शहरी इलाकों को भारी फंड देने के नारे दे रहे हैं. वह लालच दिखा रहे हैं. लेकिन चुनाव आयोग को इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है, इस पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने हैरानी जताई है.
आरोप हैं कि राज्य में लोकल बॉडी चुनावों के दौरान गरमागरम माहौल में सत्ताधारी पार्टी फिसल गई है. कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने वोट नहीं देने पर फंड रोकने की भाषा और खजाने की चाबियां हमारे पास होने जैसे बयानों की कड़ी आलोचना की है, जो सत्ता के लालच को दिखाता है.
नागपुर में मीडिया से बात करते हुए वडेट्टीवार ने मंत्रियों के बेतुके बयानों का जायजा लिया. वोट नहीं देने पर फंड नहीं मिलेगा. तो क्या महाराष्ट्र का खजाना उनकी प्राइवेट प्रॉपर्टी है? क्या यह उनके बाप-दादाओं की कमाई का खजाना है? उन्होंने सवाल उठाया. एक गुस्से वाला सवाल. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव आयोग जनता को धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल करके ऐसे बयानों को नजऱअंदाज़ क्यों करता है.
वडेट्टीवार ने कहा कि चुनाव के दौरान फंड के बारे में भाषा का इस्तेमाल करना वोटरों को लुभाने जैसा है. यह एक गंभीर उल्लंघन है और आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर वोटरों को हल्के में लेने का आरोप लगाया. एक तरफ जहां आरोप हैं कि सत्ताधारी पार्टी प्रचार के दौरान वोटरों को धमका रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि चुनाव आयोग अभी तक कोई नोटिस नहीं ले रहा है.
खुलेआम ‘सौदा’ कर रहे मंत्री, आंखें मूंदे बैठा आयोग
वडेट्टीवार ने किसानों के मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया. जहां राज्य के किसान कर्ज माफी की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि सरकार ने कुंभ मेले के लिए 25,०० करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. जब किसानों को मदद देने की बात आती है, तो सरकार के पास पैसे नहीं होते. लेकिन कुंभ मेले के लिए अचानक इतना पैसा कहां से आ जाता है? उन्होंने कहा कि इस 25०० करोड़ रुपये का इस्तेमाल कई किसानों का कर्ज माफ करने के लिए किया जा सकता है.




