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गोरगांव तहसील का कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना बना ‘सफेद हाथी’; हजारों किसान सिंचाई से वंचित

यासीन शेख गोरगांव :- तहसील में इस समय रबी सीजन की बुवाई शुरू हो चुकी है और फसलों को बड़े पैमाने पर पानी की आवश्यकता है। बावजूद इसके, क्षेत्र में दो-दो सिंचाई परियोजनाएँ होने के बाद भी किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से मोरगांव अर्जुनी विधानसभा क्षेत्र की कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना किसानों के लिए ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है ।

1915 हेक्टेयर का लक्ष्य; लाभ मात्र 500 हेक्टेयर तक

सरकार ने लगभग 1915 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाने के उद्देश्य से इस परियोजना का निर्माण किया था। हजारों किसानों ने अपनी जमीनें इस परियोजना के लिए दीं। लेकिन आज तक वास्तविक रूप से केवल लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। शेष 1415 हेक्टेयर क्षेत्र के किसान अब भी सिंचाई के लाभ से वंचित हैं।

वर्तमान में परियोजना का पानी मुख्य रूप से मोहाड़ी, बबई, कमरगांव और चोपा गांवों के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। इससे परियोजना के उद्देश्य और वास्तविक लाभ के बीच बड़ी खाई साफ दिखाई देती है।

कई गांव अब भी पानी से वंचित

परियोजना क्षेत्र के तेलनखेड़ी, घुमरो, पलखेड़ा, तुमसर, निंबा, तिल्ली मोहगांव, तानुटोला आदि गांवों के किसानों को अब तक पानी नहीं मिल पा रहा है। कुछ गांवों में भू-भाग ऊंचा-नीचा होने के कारण नहरों का निर्माण ही नहीं किया गया। वहीं हिराटोला, महसगांव, देवाटोला, पंचवटी, दवडीपार, बोटे और झांझिया गांवों तक नहरें बनाई तो गईं, लेकिन वे अधूरी और जर्जर अवस्था में हैं। परिणामस्वरूप परियोजना से छोड़ा गया पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता यह समस्या एक-दो साल की नहीं, बल्कि कई वर्षों से लंबित है। हर वर्ष रबी सीजन में किसानों को पानी की कमी के कारण फसलों का नुकसान उठाना पड़ता है।

टूटी नहरें और जाम व्यवस्था

कई स्थानों पर नहरें टूटी हुई हैं। कुछ जगहों पर गाद जमने और कचरा फंसने से पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया है। किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग मरम्मत और रखरखाव कार्यों की अनदेखी कर रहा है। नियमित रूप से गाद निकालना, नहरों की मरम्मत और पानी का सुनियोजित वितरण नहीं होने से परियोजना की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।

जनप्रतिनिधियों के आश्वासन; कार्रवाई शून्य

सिंचाई के मुद्दे पर कई बार आंदोलन, ज्ञापन और बैठकों का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को अनेक आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है किसानों का कहना है, “हमने जमीन दी, वर्षों इंतजार किया, लेकिन आज भी हमारी खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। सरकार को तत्काल नहरों की मरम्मत कर परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना चाहिए।”

तात्कालिक उपायों की आवश्यकता

विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना को पूरी क्षमता से चालू करने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं अधूरी नहरों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए टूटी और गाद से भरी नहरों की मरम्मत व सफाई की जाए ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक लिफ्ट सिंचाई योजना लागू की जाए पानी वितरण का सुनियोजित समय-सारिणी जारी की जाए

स्थानीय स्तर पर निगरानी समिति का गठन किया जाए किसानों की एकमात्र मांग कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना का मूल उद्देश्य तहसील के कृषि क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाकर उत्पादन बढ़ाना था। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए परियोजना अपने लक्ष्य से भटकी हुई नजर आ रही है। हजारों किसानों के हित से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित विभाग को तत्काल हस्तक्षेप कर परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना चाहिए, ऐसी एकमत मांग की जा रही है यहां रबी सीजन के मद्देनजर पानी का संकट और भी गंभीर हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार किसानों की आवाज सुनेगा?

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