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किताबों के बिना ही बीत रहा सत्र

– जिप स्कूल के छात्रों की व्यथा, 10 हजार प्रतीक्षा में

नागपुर :- सरकार भले ही शासकीय व अनुदानित स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता को सुधारने का दावा करती हो, लेकिन आधा सत्र बीत जाने के बाद भी जिला परिषद के स्कूलों में अनेक छात्रों को किताबें नहीं मिली हैं. अब भी 10 हजार से ज्यादा छात्रों को बिना किताबों के पढ़ाई करनी पड़ रही है. शिक्षा विभाग द्वारा पहली कक्षा से 8वीं तक के छात्रों को निःशुल्क किताबें दी जाती हैं. जिला परिषद के 1500 स्कूल हैं और 60 हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं. सत्र के आरंभमें ही छात्रों की संख्या के हिसाब से किताबें उपलब्ध कराई जानी थीं, लेकिन विभाग द्वारा स्कूलों को कम किताबें दी गईं. उम्मीद थी कि बची हुई किताबें जल्द ही मिलेंगी, लेकिन अब भी जिले में 11,5,59 छात्रों को सभी विषयों की सभी किताबें नहीं मिली हैं. इनमें पहली कक्षा के 1086, दूसरी के 658, तीसरी के के 807, चौथी के 970, पांचवीं के 1738, छठीं के 1842, सातवीं के 2102 और आठवीं के 2356 छात्र शामिल हैं. शिक्षा विभाग ने सरकार से पूरक मांग की थी, लेकिन किताबें नहीं मिल सकीं. स्कूलों में पुराने छात्रों से किताबें एकत्रित की गईं लेकिन वे भी कम पड़ रही हैं.

सरकार ने मदद से हाथ झटके

विभाग ने किताबों के लिए निधि की मांग सरकार से की थी, लेकिन सरकार ने हाथ खड़े कर दिए और बाकी किताबों के लिए मनपा से संपर्क करने को कहा गया. मनपा के स्कूलों में किताबें बचीं होने पर उनके लेने की सलाह दी गई जबकि मनपा के पास भी किताबें नहीं थीं. इससे पता चलता है कि सरकार छात्रों की शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है. जिला परिषद स्कूलों को डिजिटल किया जा रहा है. अलग-अलग मटीरियल खरीदने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन छात्रों को बिना किताबों के पढ़ाई करनी पड़ रही है.


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