– सुविधा का उद्देश्य : ज़रूरतमंदों तक पहुंचे सरकारी सहायता
मुंबई :- महाराष्ट्र सरकार द्वारा महाडीबीटी वेबसाइट पर शुरू की गई ‘गिव इट अप सब्सिडी’ योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। यह सुविधा उन नागरिकों के लिए है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और सरकारी वित्तीय सहायता या छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ नहीं लेना चाहते। लेकिन, पर्याप्त प्रचार-प्रसार की कमी के कारण अधिकांश लोगों को इस विकल्प की जानकारी तक नहीं है। राज्य सरकार ने यह सुविधा पिछले साल इस उद्देश्य से शुरू की थी कि जो नागरिक सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सक्षम नहीं हैं, वे स्वेच्छा से अपनी सब्सिडी या छात्रवृत्ति “छोड़” सकें।
इससे सरकार उन लाभों को असली ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने में सक्षम हो सके। योजना का विचार केंद्र सरकार की एलपीजी ‘गिव इट अप’ मुहिम से प्रेरित है, जिसमें लाखों नागरिकों ने अपनी गैस सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ी थी। सूत्रों के अनुसार, महाडीबीटी वेबसाइट पर यह सुविधा मौजूद तो है, लेकिन इसका प्रचार न होने से लोग इसे पहचान ही नहीं पा रहे हैं। कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें वेबसाइट पर यह विकल्प ढूँढ़ने में कठिनाई होती है, जबकि कई को इसके अस्तित्व की जानकारी ही नहीं।
अधिकारियों का मानना है कि अगर इस पहल को व्यापक रूप से सोशल मीडिया, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों के माध्यम से प्रचारित किया जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल “स्वैच्छिक पारदर्शिता” और नैतिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती है। लेकिन बिना जनजागरण और सरल प्रक्रिया के यह केवल कागज़ों तक सीमित रह सकती है। राज्य सरकार अब इस दिशा में नई प्रचार रणनीति तैयार करने पर विचार कर रही है ताकि अधिक लोग इस सुविधा से जुड़ें और आर्थिक रूप से सक्षम नागरिक “गिव इट अप” मुहिम को आगे बढ़ाएँ।




