– 3-30-300 नियम का खुलासा: हर घर तक हरियाली पहुंचाने की चुनौती
– ESR रिपोर्ट पर सवाल: क्या आंकड़ों में छिपी है सच्चाई?
नागपुर :- नगर निगम सदन में बुधवार को प्रस्तुत नवीनतम पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट (एसआर) 2०24-25 में शहर के हरित आवरण में कमियों का खुलासा हुआ और हरियाली में सुधार की आवश्यकता का व्यापक रूप से उल्लेख किया गया.
इस दस्तावेज़ में 3-3०-3०0 नियम का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि निवासियों को अपने घरों से तीन पेड़ों तक दृश्य पहुंच होनी चाहिए, कम से कम 3० प्रतिशत वृक्ष आवरण वाले क्षेत्रों में रहना चाहिए, और एक हरित स्थान से 3०0 मीटर के भीतर होना चाहिए.
ईएसआर के अनुसार, धरमपेठ जोन (जोन 2) और मंगलवारी जोन (जोन 1०) में शहर में सबसे अधिक वनस्पति है, जबकि लक्ष्मी नगर (जोन 1), हनुमान नगर (जोन 3) और आशी नगर (जोन 4) में सबसे कम वनस्पति है. शेष जोन मध्यम वनस्पति श्रेणी में आते हैं.
2०23-24 की रिपोर्ट की तुलना में, नागपुर का औसत वृक्ष आवरण 19.54 प्रतिशत था, जो अनुशंसित 3० प्रतिशत से काफी कम है. नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, धरमपेठ और मंगलवारी क्षेत्रों में औसत वृक्ष आवरण 26 प्रतिशत है, जबकि लक्ष्मी नगर, हनुमान नगर और आशी नगर क्षेत्रों में केवल 7 प्रतिशत वृक्ष आवरण है. शेष क्षेत्र 12.5 प्रतिशत वनस्पति श्रेणी में आते हैं.
सबसे कम हरियाली वाले क्षेत्रों में औसत वृक्ष आवरण 7 प्रश है. नवीनतम ईएसआर में उन अध्ययनों के निष्कर्ष शामिल हैं जो नागपुर में वृक्षों की दृश्यता, वृक्ष आवरण और 3-3०-3० नियम के अंतर्गत शहरी हरित स्थानों तक पहुंच के संदर्भ में उच्च स्तर की असमानताओं को उजागर करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कम हरियाली वाले क्षेत्रों में औसत वृक्ष आवरण मात्र 7त्न दर्ज किया गया है, जहां लगभग 80त्न निवासियों के पास आस-पास के शहरी हरित स्थान तक पहुंच नहीं है.
पर्यावरण कार्यकर्ता अनुसूया काले छाबरानी ने स्पष्टता की कमी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, ईएसआर रिपोर्ट ठोस स्थानीय सत्यापन के बिना औसत या चुनिंदा आंकड़ों पर आधारित होती हैं. इससे नीति निर्माताओं में लापरवाही और नागरिकों में अनावश्यक भ्रम पैदा होता है. हमें शहर-विशिष्ट, पारदर्शी और व्यापक मापदंडों की आवश्यकता है जिनमें वास्तविक समय की निगरानी, जमीनी स्तर की जानकारी और नागरिकों की प्रतिक्रिया शामिल हो. यह रिपोर्ट आम आदमी के लिए नगर निगम की गतिविधियों पर नजर रखने का एक साधन है. यदि इसका कोई कार्यान्वयन ही नहीं है, तो हर साल करदाताओं के करोड़ों रुपये इस रिपोर्ट पर खर्च करने का क्या फायदा?.
शहर में शहरी हरित क्षेत्रों की स्थानिक गुणवत्ता, संपर्क और कार्यात्मक उपयोगिता को संतुलित करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की सिफ़ारिश की. इसने नवीन नियोजन रणनीतियों की आवश्यकता की भी सिफ़ारिश की, जैसे कि सडक़ किनारे वृक्षारोपण कार्यक्रमों और हरित अग्रभागों के माध्यम से वृक्षों की दृश्यता बढ़ाना, छत पर बने उद्यानों, छोटे पार्कों और हरित गलियारों के माध्यम से पहुंच का विस्तार करना शामिल है.

