– हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य को नोटिस
नागपुर :- सितंबर माह से लगातार बढ़ रहे लोणार सरोवर के जलस्तर ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। सरोवर और उसके आसपास की जैव विविधता के अस्तित्व पर संकट मंडराने की आशंका जताई जा रही है। इस गंभीर मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दाखिल करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद गुरुवार को अदालत ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण तथा आईआईटी मुंबई को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में एड. मोहित खजांची को न्यायालय मित्र नियुक्त किया था और उन्हें एक सप्ताह के भीतर इस विषय पर उपयुक्त जनहित याचिका तैयार करने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश के अनुपालन में व्यायालय मित्र एड. खजांची ने गुरुवार को जनहित याचिका दायर की। इसके पश्चात अदालत ने राज्य सरकार सहित सभी अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।
जैव विविधता पर भी संकट : कमलजा माता मंदिर का ओटा सबसे पहले पानी में डूबा, जिसके बाद धीरे-धीरे मंदिर के गर्भगृह में भी पानी प्रवेश कर गया। कुछ समय पहले तक मंदिर में कमर तक पानी पहुंच चुका था और अब माता के मुखौटे का निचला भाग भी जलमग्न हो गया है। पिछले तीन से चार महीनों में जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने की पुष्टि मंदिर दर्शन के लिए आने वाले नागरिकों ने की है। चूंकि यह खारे पानी का सरोवर है, इसके बावजूद मछलियों की संख्या बढ़ने लगी है, जिससे स्थानीय जैव विविधता के नष्ट होने का खतरा उत्पन हो गया है। इस स्थिति को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।
चार प्राकृतिक स्रोत लगातार सक्रिय : याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। महाराष्ट्र के बुलढाना स्थित ‘लोणार सरोवर के बढ़ते जलस्तर’ को लेकर अखबार में प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह जनहित याचिका दर्ज करने का फैसला लिया था। लोणार सरोवर में पानी के चार प्राकृतिक स्रोत लगातार सक्रिय हैं, जिससे जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। सरोवर के तल के आसपास भी पानी के झरने मौजूद हैं, लेकिन जलस्तर बढ़ने के वास्तविक कारणों का अब तक खुलासा नहीं हो सका है, और न ही इस विषय पर कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
रहस्यमय जलवृद्धि से चिंता
प्रारंभ में वर्ष 2025 के मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ा, जिसे बारिश का परिणाम माना गया। किंतु बाद में स्थिति गंभीर होती चली गई और महादेव के विभिन्न मंदिर जलमग्न हो गए। सितंबर से शुरू हुआ यह जलप्रवाह अब तक जारी है। पहले पूरी तरह दिखाई देने वाली मंदिर के सामने की दीपमाला अब आधी पानी में डूब में डूब चुकी है। अनुमान है कि पहले के खुले स्तर की तुलना में 15 से 20 फीट तक जलस्तर बढ़ चुका है। बढ़ते जलस्तर से सरोवर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।




