– टिकट नहीं, तो बगावत तय? जोन कार्यालयों के बाहर फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
– नामांकन में सख्ती, बाहर भीड़ : मनपा चुनाव में सुरक्षा घेरा, अंदर सिर्फ प्रत्याशी को एंट्री
नागपुर :- मनपा चुनावों में टिकट नहीं मिलने की संभावना को देखते हुए इच्छुकों में रोष बना हुआ है। इच्छुक सभी जोन में नामांकन प्रक्रिया में अपनी पार्टी पर रोष जताते हुए नजर आए। सोमवार को अनेक स्थानों पर पार्टी के पदाधिकारियों ने निर्दलीय नामांकन पत्र भरा, तो कई कार्यकर्ता बेहद जल्दबाजी में नामांकन पत्र को लेकर गए। संभावना है कि, मंगलवार को निर्दलीय अपना नामांकन पत्र भरेंगे। सोमवार को प्रमुख प्रत्याशियों ने अपना नामांकन दाखिल किया है। सभी जोन कार्यालय परिसर में कड़े पुलिस बंदोबस्त में जांच की जाती रही। मंगलवार को भी नामांकन के लिए भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए सभी जोन में प्रत्याशी के साथ केवल एक व्यक्ति को प्रवेश दिया जाने की संभावना है।
मनपा के सभी 10 जोन कार्यालय परिसर में मुख्य प्रवेश द्वार पर कड़ा पहरा लगाया गया है। इस गेट पर ही पुलिस और सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा दस्तोवजों की जांच कर केवल प्रत्याशी को ही भीतर प्रवेश दिया गया। सभी जोन में भीतर प्रवेश नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं की भीड़ कार्यालयों के बाहर डटी रही। इस स्थान पर चर्चा में सभी दलों की ओर से निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी होने की चर्चा चलती रही। नेहरू नगर जोन, हनुमाननगर जोन में सोमवार को कई कार्यकर्ताओं से सुरक्षा कर्मचारियों की विवाद की स्थिति बनती नजर आई। सभी जोन कार्यालयों में आवेदन फार्म की जांच और दस्तोवजों को जोड़ने को लेकर मार्गदर्शन के लिए करीब 20 टेबल लगाए गए है। इन टेबलों पर प्रारूप की जांच के बाद ही नामंकन दर्ज कराने के लिए भीतर प्रवेश दिया जा रहा है।
भाजपा समेत सभी दलों में असंतोष
सत्ताधारी भाजपा में भी इस बार बड़ी संख्या में युवाओं ने उम्मीद लगा रखी है। ऐसे में भाजपा में खासा स्स्साखेंच मची हुई है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, दो सालों से मेहनत करने के बाद भी ऐन समय पर टिकट नहीं दिया गया। भाजपा कार्यकर्ता आस्ती पांडे ने प्रभाग 15 में उम्मीदवारी नहीं मिलने से खासा रोष जताया। पिछले दो सालों से बूथ तैयार करने, सक्रिय सदस्य तैयार करने और पदवीधर मतदाताओं का पंजीयन करने के लिए कड़ी मेहनत करने के बाद भी टिकट नहीं मिला। यही स्थिति अन्य स्थानों पर भी नजर आ रही है। सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भारी रोष दिखाई दे रहा है।








