– शिवसेना उद्धव के कार्यकर्ताओं का तीव्र प्रदर्शन
नागपुर :- देश में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में वृद्धि, रसोई गैस सिलेंडर के आसमान छूते दाम, शिक्षा क्षेत्र में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया. शुक्रवार को सुबह सीताबर्डी स्थित वेरायटी चौक पर प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई। मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ के नारे लगाए गए. शिवसैनिकों ने लोगों को मेलोडी चाकलेट बांटकर अनोख व व्यंग्यात्मक अंदाज में आंदोलन किया.
सिर और बांह पर काली पट्टियां बांधकर जताया विरोध
यह आंदोलन संपर्क प्रमुख सतीश हरड़े के मार्गदर्शन तथा महानगर प्रमुख किशोर कुमेरिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया. इस दौरान शहर प्रमुख संदीप रियाल पटेल, विक्रम राठौड़ और हरिभाऊ बानाईत सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे. आंदोलन में महानगर प्रमुख ने सिर पर काली पट्टी बांधी, जबकि सैकड़ों शिवसैनिकों ने अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधकर केंद्र सरकार की नीतियों का तीखा विरोध किया.
देश के मध्य भाग से शुरू हुआ बड़ा संघर्ष
शिवसेना के महानगर प्रमुख किशोर कुमेरिया ने कहा कि यह सिर्फ सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत संकेत है कि आज देश किस दिशा में जा रहा है. शिक्षा क्षेत्र में पेपर लीक का गंभीर मुद्दा हो, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें हों या खाद्य तेल के महंगे दाम — आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है. चाय से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की हर वस्तु महंगी हो चुकी ह. इसका सीधा और गंभीर असर आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है. इस अन्याय के खिलाफ देश के मध्य भाग यानी नागपुर से एक बड़े संघर्ष की शुरुआत हुई ह. आज बेरोजगारी से परेशान युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सक्रिय है. लेकिन वह दिन दूर नहीं जब ‘जेन जी’ पीढ़ी के युवा सडक़ों पर उतरकर इस सरकार को सबक सिखाएंगे. सरकार को अब भी सुधर जाना चाहिए, आम लोगों के बारे में सोचना चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए.
विश्वगुरु के नाम पर देश का मजाक और इवेंटबाजी
आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार पर ‘इवेंटबाजी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का मजाक बना दिया है. कोरोना काल में थालियां बजवाने से लेकर अब घरेलू गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल की कृत्रिम किल्लत पैदा करने तक, देश को संकट की ओर धकेला जा रहा है. जनता को ‘विश्वगुरु’ का सपना दिखाया जाता है और हर संकट को एक इवेंट बनाकर लोगों को गुमराह किया जाता है.