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एमएलसी चुनाव: विदर्भ बना सियासी रणक्षेत्र, नागपुर सीट पर प्रतिष्ठा की लड़ाई

नागपुर :- महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर विदर्भ का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नागपुर सहित अमरावती, चंद्रपुर, वर्धा, यवतमाल, भंडारा और गोंदिया में महायुति और महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस चुनाव के नतीजे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं।सबसे अधिक चर्चा नागपुर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की हो रही है, जहां भाजपा समर्थित महायुति उम्मीदवार डॉ. राजीव पोतदार और कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे आमने-सामने हैं। यह सीट राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के विधानसभा में चुने जाने के बाद रिक्त हुई थी, जिसके कारण उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने डॉ. राजीव पोतदार को सामाजिक कार्यकर्ता और चिकित्सक की छवि के साथ मैदान में उतारा है। पार्टी का दावा है कि महायुति के पास स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों का स्पष्ट बहुमत है और जीत लगभग तय है। दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार अतुल लोंढे बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महंगाई और विकास कार्यों के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। विदर्भ की अन्य सीटों पर भी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। वर्धा-चंद्रपुर-गड़चिरोली क्षेत्र में भाजपा के अरुण लाखानी और कांग्रेस के शैलेश अग्रवाल के बीच सीधी टक्कर है। यवतमाल में शिवसेना (शिंदे गुट) के दुष्यंत चतुर्वेदी और कांग्रेस के साहेबराव कांबले आमने-सामने हैं। अमरावती में भाजपा के प्रवीण पोटे पाटिल और कांग्रेस के हर्षदीप देशमुख के बीच मुकाबला होने जा रहा है। भंडारा-गोंदिया में भी चुनावी समीकरण लगातार बदल रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान दोनों गठबंधनों ने शक्ति प्रदर्शन किया। हालांकि, कुछ स्थानों पर बगावत और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने चुनाव को और रोचक बना दिया है। कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, जबकि महायुति अपने संगठनात्मक एकजुटता का दावा कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2027 के स्थानीय निकाय चुनावों और विदर्भ में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। 18 जून को होने वाले मतदान और 22 जून को आने वाले परिणामों पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं। नागपुर की सीट को विशेष रूप से भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है।


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