Home Latest News ‘मुंबई धर्मशाला बनकर रह गया, मराठियों का अस्तित्व खतरे में’

‘मुंबई धर्मशाला बनकर रह गया, मराठियों का अस्तित्व खतरे में’

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<p><strong>&&num;8211&semi; बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी पर उद्धव गुट का निशाना<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की आज &lpar;शुक्रवार&comma; 23 जनवरी&rpar; को जन्म शताब्दी है&period; आज बाल ठाकरे 100 साल की उम्र के हो जाते&period; &&num;8216&semi;हिंदूहृदयसम्राट&&num;8217&semi; कहे जाने वाले बाल ठाकरे के लिए उद्धव गुट के मुखपत्र सामना में लेख छपा है&comma; जिसके जरिये उद्धव ठाकरे गुट ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है&period;<&sol;p>&NewLine;<p><strong>&&num;8216&semi;कुछ लोगों की उम्र हो चुकी है<&sol;strong>&&num;8216&semi;<&sol;p>&NewLine;<p>सामना में बिना नाम लिए संजय राउत ने लिखा&comma; &&num;8220&semi;महान व्यक्तियों को उम्र से नहीं मापा जा सकता&period; बालासाहेब जैसे महान लोगों की महानता उनकी उम्र पर निर्भर नहीं करती&period; देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनकी उम्र हो चुकी है फिर भी देश पर बोझ बने बैठे हैं&comma; लेकिन बालासाहेब जैसे नेता हमेशा अमर और प्रेरणादायक लगते हैं&period; उनकी महानता उम्र पर निर्भर नहीं करती&period; यह उनके कार्यों&comma; विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान पर निर्भर करती है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>संजय राउत ने आगे लिखा&comma; &&num;8220&semi;जिस &OpenCurlyQuote;मराठी’ समाज का हम हिस्सा हैं&comma; वह अव्यवस्थित&comma; नेतृत्वहीन और बिना रीढ़ का हो चुका है&period; उसकी राय और अस्तित्व का कोई मूल्य नहीं है&period; उसकी कोई सार्वजनिक राय नहीं है&comma; राज दरबार में उसका कोई महत्व नहीं है&period; महाराष्ट्र की इस धरती पर जन्म लेने के बावजूद&comma; &OpenCurlyQuote;मराठी’ होने के कारण लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है&period; यह अन्याय है और बालासाहेब ने इसे दिल से महसूस किया&period; परिणामस्वरूप&comma; उन्होंने यह निश्चय किया कि मराठी लोगों में जागरूकता और एक सशक्त संगठन बनाना उनका लक्ष्य है&period; उन्होंने यह तय किया कि वे इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ताउम्र निरंतर प्रयास करते रहेंगे&period;&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;<p><strong>&&num;8216&semi;हमेशा के लिए मिट गए होते मराठी&&num;8217&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>सामना में लिखा गया है&comma; &&num;8220&semi;सच तो यह है कि अगर बालासाहेब ने मुंबई में शिवसेना की स्थापना न की होती&comma; तो महाराष्ट्र की इस राजधानी से मराठी लोग हमेशा के लिए मिट गए होते&period; एक तो मुंबई में मराठी मानुस की संख्या कम है और उस पर शासकों की लापरवाही&period; इसी वजह से मुंबई की हालत एक धर्मशाला जैसी हो गई है &OpenCurlyQuote;आओ जाओ घर तुम्हारा&excl;’ पिछले 50 साल में इस धर्मशाला का दायरा और भी बढ़ गया है&period;&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;<p><strong>&&num;8216&semi;मराठी लोगों का अस्तित्व नहीं बचा&&num;8217&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>मुंबई से ढाई लाख मिल मजदूर गायब हो गए&period; इसी वजह से गिरणगाव &lpar;मिल मजदूरों की बसाहत&rpar; का इतिहास और भूगोल बदल गया&period; गिरणगाव की चिमनियां गायब हो गर्इं और उनकी जगह गगनचुंबी टावर बन गए&period; इन टावरों में अब मराठी लोगों का अस्तित्व नहीं बचा&period; ये सभी टावर राक्षस बनकर मुंबई की &OpenCurlyQuote;मराठी पहचान’ को नष्ट करने पर तुले हैं&period; ऐसे वक्त में आज बालासाहेब की याद आती है&period;<&sol;p>&NewLine;

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