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नागपुर की ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था पर हाई कोर्ट सख्त, खुद लिया संज्ञान

– स्मार्ट सिटी का दावा फेल : 171 में सिर्फ 10 ट्रैफिक सिग्नल अपग्रेड

– लाल-पीली-हरी लाइट एक साथ ! शहर के चौराहे बन रहे जानलेवा

नागपुर :- सिटी की दम तोड़ रही ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था को लेकर न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे की ओर से स्वयं संज्ञान लिया गया. इसे जनहित याचिका के रूप में प्रेषित करने के लिए अधि. उत्कर्ष खोबरागडे को अदालत मित्र के रूप में नियुक्त किया गया. हाई कोर्ट ने शहर की चरमराती ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था और इसके खराब रखरखाव पर कड़ा रुख अपनाया है. खबर के अनुसार नागपुर शहर में कुल 171 ट्रैफिक सिग्नल जंक्शन हैं लेकिन ‘केल्ट्रॉन’ (केल्ट्रॉन) कंपनी पहल के तहत इनमें से केवल 10 सिग्नलों को ही अपग्रेड किया गया है. रिपोर्टों में यह उजागर किया गया है कि रखरखाव के अभाव और सिग्नलों के ठीक से काम न करने के कारण पूरी व्यवस्था विफल हो रही है, साथ ही इस अव्यवस्था के लिए जवाबदेही की भी भारी कमी देखी गई है.

शहर के कई प्रमुख चौराहे जैसे ईस्ट हाई कोर्ट रोड, अवस्थीनगर चौक, ट्रैफिक पार्क टी-पॉइंट, यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी चौक, नेल्सन स्क्वायर, लिबर्टी स्क्वायर, गड्डीगोदाम, इंदोरा चौक और मंगलदीप चौक इन विफलताओं की मार झेल रहे हैं.

अवस्थीनगर में तो स्थिति इतनी भयावह है कि एक तरफ की रेड लाइट बंद रहती है, जबकि दूसरी तरफ की ग्रीन लाइट चलती रहती है जिससे रोजाना दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है. जीपीओ स्क्वायर और राजा रानी स्क्वायर पर रेड लाइट ब्लिंक होने के कारण चालक लंबे समय तक खड़े रहते हैं, जब तक उन्हें यह समझ नहीं आता कि यह एक तकनीकी खराबी है. कई जंक्शनों पर हरी बत्तियां नहीं जलतीं जिससे चालक भ्रमित रहते हैं. वहीं कई जगहों पर लाल बत्तियां बंद पड़ी हैं जिससे व्यस्त समय में भारी अराजकता पैदा होती है. स्थिति तब और खराब हो जाती है जब कुछ जंक्शनों पर लाल, पीली और हरी तीनों लाइटें एक साथ जलने लगती हैं जिससे वाहन चालकों को खतरनाक मोड़ लेने पर मजबूर होना पड़ता है. रात के समय नियमों के अनुसार स्थिर अंबर (पीली) लाइट की बजाय रेड लाइट ब्लिंक करती है जो नियमों का उल्लंघन है.न्यायाधीश अनिल किल्लोर और राज वाकोडे की खंडपीठ ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता उत्कर्ष खोबरागडे को अदालत मित्र नियुक्त किया गया है। शहर में कुल 171 ट्रैफिक सिग्नल जंक्शन हैं, जिनमें से केवल 10 ही अपग्रेड किए गए हैं। स्मार्ट सिटी और 197 करोड़ के IITMS प्रोजेक्ट का दावा जमीन पर फेल नजर आ रहा है। कई चौराहों पर सिग्नल काम नहीं कर रहे, तो कहीं तीनों लाइट एक साथ जल रही हैं। इससे वाहन चालकों में भ्रम की स्थिति बन रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। अवस्थीनगर, नेल्सन स्क्वायर, इंदोरा चौक जैसे इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर है। रात के समय नियमों के खिलाफ रेड लाइट ब्लिंक करती पाई गई है। खराब रखरखाव और जवाबदेही की कमी भी सामने आई है। हाई कोर्ट ने इस लापरवाही को जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है। अब कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन पर सुधार की जिम्मेदारी तय मानी जा रही है।

स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट का दावा फेल

रिपोर्ट के अनुसार शहर को स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट देने का वादा अब वाहन चालकों के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहा है. 197 करोड़ के इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईआईटीएमएस) प्रोजेक्ट के बावजूद सड़कों पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है. हकीकत यह है कि शहर के 171 ट्रैफिक सिग्नल जंक्शनों में से केवल 10 को ही अपग्रेड किया गया है, जबकि बाकी के सिग्नल खराब रखरखाव और तकनीकी खामियों के कारण दम तोड़ रहे हैं. जमीनी हकीकत की जांच में सामने आया है कि


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