– 139 संविदा सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति, अप्रैल 2027 तक संभालेंगे शिक्षण कार्य
नागपुर :- राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। विश्वविद्यालय में स्वीकृत 255 पूर्णकालिक शिक्षकों के पदों में से केवल 83 पद भरे हैं, जबकि 172 पद रिक्त हैं। यानी करीब 67 फीसदी पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों की कमी को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक बार फिर संविदा नियुक्तियों का सहारा लिया है।
वर्ष 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय ने 139 संविदा सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति पूरी कर ली है। ये शिक्षक 30 अप्रैल 2027 तक कार्यरत रहेंगे और उन्हें हर महीने 40 हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा। विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्थायी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। प्रबंधन नियमित भर्ती में तकनीकी अड़चनों का हवाला देते हुए संविदा शिक्षकों की नियुक्ति करता रहा है। विश्वविद्यालय के 31 विभागों में स्थिति अधिक गंभीर है। कई विभागों में एक भी पूर्णकालिक शिक्षक नहीं है।
प्रोफेसर के 38 में सिर्फ 2 पद भरे
विश्वविद्यालय के विभागों में कुल 218 स्वीकृत शिक्षक पदों में बड़ी संख्या रिक्त है। इनमें प्रोफेसर के 38 पदों में केवल 2, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर के 66 पदों में सिर्फ 13 पद भरे हैं। इसी तरह 114 स्वीकृत सहायक प्राध्यापक पदों में 58 पदों पर ही नियुक्ति है। विश्वविद्यालय के विधि महाविद्यालय और बीएड कॉलेज में भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
स्थायी नियुक्तियों में लगातार हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीनेट सदस्य मनमोहन बाजपेयी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं कुलाधिपति और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त रहने का असर शिक्षण और शोध कार्य पर पड़ रहा है। हाल ही में हुई सीनेट बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने नागपुर विश्वविद्यालय और एलआईटीयू के रजिस्ट्रार को आरक्षण रोस्टर को लेकर चर्चा के लिए बुलाया था। इससे संकेत मिल रहे हैं कि नियमित भर्ती प्रक्रिया अभी भी आरक्षण रोस्टर से जुड़े मुद्दों के समाधान पर निर्भर है।








