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7 दिसंबर से नागपुर शीतकालीन सत्र

– मानसून सत्रावसान: सत्र में 22 में से 21 शासकीय विधेयक हुए मंजूर

मुंबई :- महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र का शुक्रवार को सत्रावसान हो गया। इस दौरान विधानसभा में लगभग 127 घंटे तक कामकाज हुआ। विधानसभा में सरकार ने इस सत्र में 22 शासकीय विधेयक पेश किए, जिनमें से 21 को मंजूरी मिल गई। सत्र की सबसे अहम उपलब्धियों में महिला किसानों को किसान का दर्जा देने वाला विधेयक रहा। इस विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों ने पारित कर दिया। इसके लागू होने के बाद महिला किसानों को कृषि क्षेत्र में आधिकारिक पहचान मिलने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने का मार्ग और अधिक सुलभ होगा। मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस भी देखने को मिली। किसानों, बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, आरक्षण, परिवहन, शिक्षा और राज्य के विकास से जुड़े कई विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जबकि विपक्ष ने जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया। अब विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से नागपुर में आयोजित किया जाएगा।

सावरकर को भारत रत्न देने के प्रस्ताव पर नाराज हुए मुनगंटीवार

विधानमंडल के मानसून सत्र में भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने शुक्रवार को वीर सावरकर को भारत रत्न देने के प्रस्ताव में हो रही देरी पर अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद किसी भी दल को अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए। यदि सरकार का रुख बदल गया है तो उसे स्पष्ट रूप से इसकी घोषणा करनी चाहिए। मुनगंटीवार ने विधानसभा में कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न देने संबंधी प्रस्ताव को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने 5 मार्च को आश्वासन दिया था कि इसे जल्द सदन में लाया जाएगा। इसके बावजूद यह प्रस्ताव न तो बजट सत्र में और न ही मौजूदा मानसून सत्र की कार्यसूची में शामिल किया गया।

नार्वेकर बोले, बीएसी में नहीं हुई चर्चा

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मुनगंटीवार के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में चर्चा के लिए नहीं आया था, इसलिए इसे सदन के सामने पेश नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव को सदन में लाने से पहले सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को सूचना देना और बीएसी में चर्चा कराना आवश्यक होता है। सरकार भी इस मामले को आगे बढ़ा रही है। नार्वेकर ने आश्वासन दिया कि अगले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।

विप में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना (शिंदे) में तनातनी

उधर विधान परिषद में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के विधायकों में तनातनी हो गई। शुक्रवार को सदन में भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर और शिवसेना (शिंदे) विधायक बच्चू कडू एक बार फिर से भिड़ गए। सभापति राम शिंदे के हस्तक्षेप के बाद दोनों विधायक शांत हुए। दरअसल, सदन में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक भाजपा विधायक चित्रा वाघ ने पालघर के दाभाड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों की लापरवाही के कारण गर्भवती महिला को प्रसूति के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने को लेकर सवाल पूछा था। चित्रा ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण महिला के बच्चे की मौत हो गई है। इस पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर जवाब देने के लिए उठे थे। इस बीच शिवसेना (शिंदे) के विधायक कडू खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि सुबह के समय नियम 97 के तहत उठाए गए मेरे मुद्दों के लिए सदन में केवल पांच मिनट का समय दिया गया। इस पर भाजपा विधायक दरेकर ने कडू के अचानक खड़े होने पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि कडू जब से इस सदन में आए हैं, तब से सदन के कामकाज में व्यवधान हो रहा है। इसके जवाब में कडू ने दरेकर से कहा कि मुझे चुप कराने वाले आप कौन हैं ? इसके बाद सभापति ने कहा कि विधायकों को नपा-तुला सवाल पूछना चाहिए और मंत्रियों को भी सवाल को ध्यान में रखते हुए जवाब देना चाहिए।


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