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15 जून से नया सत्र छात्रों के साथ अन्याय

– सीएम को भेजा पत्र, 26 के बाद ही शुरू करने की मांग

नागपुर :- विदर्भ में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच 15 जून से स्कूल शुरू करने के विभाग के आदेश का कड़ा विरोध किया जा रहा है. महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद के कार्याध्यक्ष नागो गाणार ने मुख्यमंत्री और शालेय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक सत्र 26 जून के बाद शुरू करने की मांग की है. इस संबंध में भेजे पत्र में बताया गया कि विदर्भ में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आदेश जारी कर सभी स्कूलों का समय सुबह 7 से 10.30 बजे तक सीमित कर दिया है. ऐसे हालात में बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है. पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों की आयु 6 से 17 वर्ष के बीच होती है जो अत्यधिक गर्मी सहन नहीं कर पाते. इसके बावजूद शिक्षा संचालनालय द्वारा 28 मार्च को जारी आदेश के तहत पूरे राज्य के साथ विदर्भमें भी 15 जून से स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया गया है. यह आदेश माध्यमिक शाला संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है. साथ ही मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ के 8 जून 2007 के निर्णय की भी अवहेलना करता है जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कायम रखा था. पत्र में यह भी कहा गया है कि 15 जून तक विदर्भ में तापमान और बढने की आशंका है. ऐसे में पर्याप्त बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं की कमी वाले स्कूलों में बच्चों को भेजना जान जोखिम में डालने जैसा होगा. इससे अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है. शिक्षक परिषद ने सरकार मांग की है कि विद्यार्थियों के हित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विदर्भ क्षेत्र में स्कूलों का शैक्षणिक सत्र 26 जून के बाद ही शुरू किया जाए.


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