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नागपुर में संतरा संकट : 50 फीसदी उत्पादन घटा, दाम पहुंचे 120 रुपए किलो तक

– ‘ऑरेंज सिटी’ में महंगा हुआ स्वाद : कलमना मंडी में कम आवक से कीमतों में जबरदस्त उछाल

– मौसम की मार और निर्यात झटका : किसानों को नहीं मिल पा रहा बढ़ी कीमतों का लाभ

नागपुर :- ‘ऑरेंज सिटी’ के नाम से मशहूर नागपुर और आस-पास के क्षेत्रों में इस साल संतरे का स्वाद कड़वा होता जा रहा है। प्रतिकूल मौसम और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार के कारण इस साल संतरे के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। कम आपूर्ति के कारण थोक बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम उपभोक्ता की पहुंच से संतरा दूर होता जा रहा है। नागपुर की प्रसिद्ध कलमना मंडी में आवक कम होने से कीमतों में भारी उछाल आया है। मंडी में गुणवत्ता के आधार पर संतरा 30 रुपए से 55 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। शहरों के रिटेल मार्केट में यही संतरा 80 रुपए से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। प्रीमियम क्वालिटी का संतरा मार्केट में 250 से 350 रुपए प्रति दर्जन के हिसाब से बिक रहा है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। उत्पादन घटने के 3 मुख्य कारण : फलों के थोक व्यापारी राजेश छाबरानी के अनुसार इस साल ‘मृग बहार’ की फसल खराब हुई है। फूल आने के समय अचानक बढ़ी गर्मी और फिर बेमौसम बारिश से पेड़ों से फूल झड़ गए। विदर्भ के कई हिस्सों में भू-जल स्तर गिरने से सिंचाई की समस्या पैदा हुई, जिससे फलों का आकार छोटा रह गया। फंगल इन्फेक्शन और कीटों के हमले ने बची-कुची कसर पूरी कर दी, जिससे फल पकने से पहले ही गिरने लगे।

भले ही कीमतें बढ़ी हुई दिख रही हैं, लेकिन किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उत्पादन आधा होने के कारण उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इस साल पेड़ों पर फल बहुत कम हैं। जो फल बचे हैं, उनका आकार छोटा है।

उम्मीद थी कि, निर्यात से भरपाई होगी, लेकिन बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने से स्थानीय व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। बाजार में ‘किन्नू’ का बढ़ा दबदबा : नागपुर संतरे की कमी का फायदा पंजाब और राजस्थान से आने वाले किल्लू को मिल रहा है। बाजार में किल्लू 40-60 रुपए प्रति किलो में आसानी से उपलब्ध है, जिसके कारण स्थानीय लोग संतरे के बजाय किल्लू को प्राथमिकता दे रहे हैं। शहर की प्रमुख थोक बाजार कलमना मंडी में इस साल संतरे की आवक में भारी कमी आई है। व्यापारियों के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार ट्रकों की संख्या आधी रह गई है। परिणामस्वरूप थोक दरों में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है, जिसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बेमौसम बारिश, अत्यधिक तापमान और लंबे सूखे अंतराल ने संतरे के बागानों को नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्रों में फल समय से पहले झड़ गए, जबकि कुछ जगहों पर आकार और गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इससे निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संतरा उत्पादक किसानों के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर उत्पादन घटा है, तो दूसरी ओर लागत बढ़ी है। कीटनाशकों, खाद और सिंचाई पर खर्च बढ़ने के बावजूद अपेक्षित पैदावार नहीं मिल पाई। कई किसानों ने बताया कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में संतरा उत्पादन और प्रभावित हो सकता है। खुदरा बाजार में संतरे के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।

बाजार में बदल रही उपभोक्ताओं की पसंद

पहले जहां आम परिवार नियमित रूप से संतरा खरीद पाते थे, अब बढ़ती कीमतों के कारण लोग मात्रा कम कर रहे हैं। व्यापारियों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों ने जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों, बेहतर सिंचाई प्रबंधन और रोग-प्रतिरोधी पौधों के उपयोग पर जोर दिया है। साथ ही सरकार से मांग की जा रही है कि प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। ‘ऑरेंज सिटी’ की पहचान माने जाने वाले संतरे पर आया यह संकट न केवल किसानों, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।


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