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एशियन गेम्स : कबड्डी में भारत की बेटियों को मिला गोल्ड

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– फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया, मैराथन और शूटिंग में मिले सिल्वर

नागोया :- एशियन गेम्स 2026 के सातवें दिन भारत ने महिला कबड्डी में स्वर्ण पदक जीत लिया। शनिवार को खेले गए फाइनल में भारतीय महिला टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। इसके साथ ही भारतीय महिला कबड्डी टीम ने लगातार पांचवें एशियन गेम्स में पदक जीतने का सिलसिला बरकरार रखा।

भारत का यह दिन का चौथा पदक रहा। इससे पहले पुरुष मैराथन और महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन स्पर्धा में भारत ने सिल्वर जीता। पुरुष मैराथन में सावन बरवाल ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड के समय के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस स्पर्धा में भारत को 44 साल बाद पदक मिला है। इससे पहले 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

शूटिंग में 11वां पदक

महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में आशी चौकसे, तिलोत्तमा सेन और विदार्शा विनोद की भारतीय टीम दूसरे स्थान पर रही। शूटिंग में यह भारत का इस एशियन गेम्स का 11वां पदक है। इससे पहले भारत ने शूटिंग में एक गोल्ड, पांच सिल्वर और चार ब्रॉन्ज जीते थे।

मेडल टैली में 12वें स्थान पर भारत

महिला कबड्डी में गोल्ड के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 27 हो गई है। इनमें 3 गोल्ड, 11 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। भारत पदक तालिका में 12वें स्थान पर बना हुआ है।

बॉक्सिंग में कपिल क्वार्टर फाइनल में

पुरुषों के 90 किग्रा वर्ग में भारत के कपिल ने एस्ताकी को 5-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। अब 28 सितंबर को उनका मुकाबला दक्षिण कोरिया के किम गिचाए या पाकिस्तान के इरफान खान से होगा। पुरुष कबड्डी टीम का फाइनल भी ईरान के खिलाफ होना है।

बाढ़ के तीन साल, सबक अब भी अधूरा

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– कई काम पूरे, लेकिन जलनिकासी और नालों की बदहाली बरकरार

नागपुर :- 23 सितंबर 2023 को अंबाझरी बांध से नीचे और नाग नदी के किनारे के इलाकों में आई भीषण बाढ़ को तीन साल पूरे हो गए हैं। करीब 109 मिमी बारिश कुछ ही घंटों में होने से अंबाझरी तालाब से बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहा और पश्चिम नागपुर के कई हिस्से जलमग्न हो गए थे। इस बाढ़ ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था और नाग नदी की जलवहन क्षमता की खामियों को उजागर किया था।

बाढ़ के बाद कई बड़े इंजीनियरिंग कार्य किए गए हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण काम अब भी अधूरे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण में पाया गया कि रिटेनिंग वॉल का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। वहीं कई नाले या तो पर्याप्त नहीं हैं या पत्तियों और अन्य कचरे से जाम हैं। शंकर नगर, यशवंत नगर और अंबाझरी लेआउट जैसे क्षेत्रों में सड़कें ऊंची किए जाने के कारण कई मकान सड़क के स्तर से नीचे हो गए हैं। इससे भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

शंकर नगर के स्थानीय निवासियों के मुताबिक बाढ़ के बाद प्रशासन ने कई काम किए हैं, लेकिन अब जलनिकासी व्यवस्था के नियमित रखरखाव और प्राकृतिक जलमार्गों को अवरोधमुक्त रखने पर ध्यान देने की जरूरत है। लोगों ने अंबाझरी के ओवरफ्लो प्वाइंट और नाग नदी के आसपास मौजूद अवरोधों तथा लगातार बढ़ाए जा रहे सड़क स्तर पर भी चिंता जताई।

सड़कों के कांक्रीटीकरण ने बढ़ाई चिंता

यशवंत नगर के स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़कों के बड़े पैमाने पर कांक्रीटीकरण से बारिश के पानी के जमीन में रिसने की प्राकृतिक क्षमता कम हुई है। सड़क, फुटपाथ और अन्य पक्के हिस्सों के बढ़ने से पानी के जमीन में समाने के रास्ते सीमित हो गए हैं। वहीं, अंबाझरी लेआउट निवासी और बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि तालाब और उसके डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें बांध के तटबंध को मजबूत और चौड़ा करना तथा तालाब से पानी के नियंत्रित प्रवाह के उपाय शामिल हैं।

केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्लूपीआरएस) की 2023 की बाढ़ संबंधी रिपोर्ट में नाग नदी पर स्थित एक निचले पुल के नीचे पानी के सीमित प्रवाह को बाढ़ के प्रमुख कारणों में बताया गया था। इसके बाद पुराने पुल को हटाकर पानी के बेहतर प्रवाह के लिए नए पुल का निर्माण किया गया।

पाण्याचे नियोजन

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पाणी ही केवळ नैसर्गिक संपत्ती नसून मानवी जीवन, शेती, उद्योग आणि संपूर्ण अर्थव्यवस्थेचा आधार आहे. मात्र पावसाचे बदलते स्वरूप, अनियमित मान्सून, वाढती लोकसंख्या आणि पाण्याचा वाढता वापर यामुळे भविष्यातील जलसुरक्षेचा प्रश्न अधिक गंभीर होत आहे. यंदाच्या पावसातील तुटवडा हा केवळ एका हंगामाचा प्रश्न म्हणून पाहून चालणार नाही. तो जलव्यवस्थापनातील त्रुटी, अपुऱ्या नियोजनाची गरज आणि उपलब्ध पाण्याच्या काटकसरीने वापराचे महत्त्व अधोरेखित करणारा इशारा आहे.

महाराष्ट्रात शेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. पावसाचे आगमन उशिरा होणे, काही काळ पावसाने दडी मारणे किंवा कमी कालावधीत मोठ्या प्रमाणात पाऊस पडणे, या सर्व परिस्थितींचा थेट परिणाम शेतीवर होतो. एकीकडे मुसळधार पावसामुळे पाणी वाहून जाते, तर दुसरीकडे पावसाच्या खंडामुळे जमिनीतील ओलावा कमी होतो. त्यामुळे केवळ पाऊस किती झाला यापेक्षा तो किती काळ, कोणत्या भागात आणि कोणत्या स्वरूपात झाला, याचा विचार जलनियोजन करताना करणे आवश्यक आहे.

जलसुरक्षेसाठी सर्वप्रथम उपलब्ध पाण्याचे अचूक नियोजन करणे गरजेचे आहे. धरणे, तलाव, बंधारे, विहिरी आणि भूजलसाठे यांची सद्यस्थिती नियमितपणे तपासली पाहिजे. कोणत्या भागात किती पाणीसाठा आहे, त्यातून पिण्याचे पाणी, शेती आणि इतर गरजा किती काळ भागू शकतात, याचे वास्तववादी अंदाज तयार झाले पाहिजेत. पाण्याचे नियोजन केवळ संकट निर्माण झाल्यानंतर सुरू होण्याऐवजी वर्षभर चालणारी प्रक्रिया बनली पाहिजे. शेतीच्या क्षेत्रातही पाण्याच्या वापराबाबत मोठा बदल आवश्यक आहे. कमी पाण्यात अधिक उत्पादन देणाऱ्या पिकांकडे वळणे, ठिबक आणि तुषार सिंचनाचा विस्तार करणे, पावसाचे पाणी शेतात अडवणे आणि जमिनीतील ओलावा टिकवून ठेवण्यासाठी योग्य पद्धतींचा वापर करणे आवश्यक आहे. प्रत्येक भागासाठी एकच पीक पद्धती लागू करण्याऐवजी स्थानिक हवामान, माती आणि उपलब्ध पाण्यानुसार पीक नियोजन करण्याची गरज आहे. यामुळे पाण्याचा अपव्यय कमी होण्याबरोबरच शेतकऱ्यांचा उत्पादन खर्चही नियंत्रित करण्यास मदत होऊ शकते.

पावसाचे पाणी साठवण्याला अधिक महत्त्व देण्याची वेळ आली आहे. शहरांमध्ये छतावरील पावसाचे पाणी संकलित करून भूजल पुनर्भरण करता येऊ शकते. ग्रामीण भागात शेततळी, नाला खोलीकरण, छोटे बंधारे आणि जलसंधारणाची कामे योग्य ठिकाणी केल्यास पावसाचे पाणी वाहून जाण्याऐवजी स्थानिक पातळीवर साठवता येते. मात्र अशा कामांची निवड केवळ कागदावरील उद्दिष्टांवर न होता भौगोलिक परिस्थिती आणि प्रत्यक्ष गरज लक्षात घेऊन झाली पाहिजे.

शहरांमध्ये पाण्याचा वापर आणि गळती हा देखील महत्त्वाचा प्रश्न आहे. जुन्या जलवाहिन्यांमधून मोठ्या प्रमाणावर पाणी वाया जात असल्यास नवीन जलस्रोत निर्माण करण्यापेक्षा आधी उपलब्ध पाण्याची बचत करणे अधिक व्यवहार्य ठरू शकते. घरगुती पातळीवरही पाण्याचा काटकसरीने वापर, सांडपाण्यावर प्रक्रिया आणि पुनर्वापर यांना प्रोत्साहन मिळायला हवे. विशेषतः बागकाम, स्वच्छता आणि औद्योगिक प्रक्रियांमध्ये प्रक्रिया केलेल्या पाण्याचा वापर वाढवता येऊ शकतो. भूजलाचा अनियंत्रित उपसा ही भविष्यासाठी चिंतेची बाब आहे. विहिरी आणि बोअरवेलमधून पाणी उपसले जात असताना त्याच्या पुनर्भरणाकडे दुर्लक्ष झाले तर भूजलपातळी सातत्याने खालावू शकते. त्यामुळे भूजल वापर आणि पुनर्भरण यांच्यात संतुलन राखणे आवश्यक आहे. स्थानिक स्वराज्य संस्था, ग्रामपंचायती आणि नागरिकांनी मिळून भूजलसाठ्यांचे संरक्षण करण्यासाठी ठोस उपाययोजना करणे गरजेचे आहे.

जलसुरक्षा ही केवळ सरकारची जबाबदारी नाही. नागरिक, शेतकरी, उद्योग, स्थानिक संस्था आणि प्रशासन या सर्वांची त्यात भूमिका आहे. पाण्याची उपलब्धता मर्यादित असताना प्रत्येकाने आपल्या वापराची जबाबदारी स्वीकारणे आवश्यक आहे. पाणी वाचविणे ही केवळ घोषणांची बाब न राहता दैनंदिन जीवनातील सवय झाली पाहिजे. यंदाच्या पावसातील तुटवडा हा भविष्यासाठी सावध करणारा संकेत मानला पाहिजे. पावसावर नियंत्रण ठेवणे कोणाच्याही हातात नाही; मात्र पावसातून मिळणाऱ्या प्रत्येक थेंबाचे नियोजन करणे नक्कीच शक्य आहे. जलसंधारण, भूजल पुनर्भरण, पिकांचे नियोजन, पाण्याचा पुनर्वापर आणि गळती रोखणे या उपायांना दीर्घकालीन धोरणाची जोड मिळाली तर पाण्याचे संकट काही प्रमाणात कमी करता येईल. आज पाण्याचे योग्य नियोजन केले तरच उद्याच्या पिढीला सुरक्षित जलसाठा उपलब्ध करून देता येईल. त्यामुळे पाण्याची बचत ही केवळ आजची गरज नसून भविष्यातील सुरक्षिततेची गुंतवणूक आहे.

पुलिसकर्मी ने किया नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म

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– गर्भवती होने के बाद सामने आया मामला, आरोपी सिपाही अरेस्ट

नागपुर :- नागपुर। गिट्टीखदान थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में पुलिस विभाग के एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया है। छात्रा के गर्भवती होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। आरोपी की पहचान 25 वर्षीय प्रतीक विनोद धरपाल के रूप में हुई है। वह शहर पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम में तैनात बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, छात्रा की वर्ष 2022 में आरोपी प्रतीक से इंस्टाग्राम के जरिए पहचान हुई थी। आरोप है कि 17 अगस्त को प्रतीक ने छात्रा को मुलाकात के लिए अपने घर बुलाया, जहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 22 सितंबर को छात्रा स्कूल में कक्षा के दौरान अचानक चक्कर खाकर गिर गई। शिक्षकों ने उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकीय जांच और सोनोग्राफी में छात्रा के करीब छह सप्ताह की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद चिकित्सकों ने धंतोली पुलिस को सूचना दी। धंतोली पुलिस ने मामले की जानकारी मिलने पर प्रकरण दर्ज किया और आगे की जांच के लिए मामला गिट्टीखदान पुलिस को सौंप दिया। गिट्टीखदान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में पुलिस द्वारा आगे की जांच जारी है।

एमडी बेचने से पहले की पकड़ा गया आरोपी

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– एंटी नारकोटिक्स टीम की कार्रवाई, 10.06 लाख का माल जब्त

नागपुर :- यशोधरानगर थाना क्षेत्र में क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टीम ने कार्रवाई करते हुए 58.600 ग्राम एमडी पाउडर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान हमीद नगर, यशोधरानगर निवासी इजाजुद्दीन सिद्दीकी रियाजुद्दीन सिद्दीकी (40) के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, 24 सितंबर की रात करीब 8.20 बजे एंटी नारकोटिक्स टीम को सूचना मिली थी कि संघर्ष नगर स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना परिसर में एक व्यक्ति काले रंग की स्कॉर्पियो में एमडी पाउडर बेचने के लिए पहुंचा है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर स्कॉर्पियो क्रमांक एमएच-35/ पी-6465 को घेर लिया और चालक को हिरासत में लिया। पंचों की मौजूदगी में तलाशी लेने पर आरोपी की जींस की दाहिनी जेब में जिपलॉक पन्नी से 58.600 ग्राम एमडी पाउडर बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और स्कॉर्पियो सहित कुल 10 लाख 6 हजार 800 रुपये का मुद्देमाल जब्त किया। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि एमडी पाउडर उसके साथी अमीर मुकीम मलिक और उसके भाई करीम मुकीम मलिक का है। उसने यह भी बताया कि शिबु मलिक, कैफ मलिक, सागर मोहम्मद लतीफ अंसारी और ओसामा के साथ मिलकर एमडी की बिक्री की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अन्य आरोपियों को एमडी पाउडर देने के लिए मौके पर पहुंचा था।

यशोधरानगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपी इजाजुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ इससे पहले नागपुर शहर में अलग-अलग थाना परिसरों में करीब 22 अपराधिक मामले दर्ज हैं। मामले में फरार बताए गए अन्य आरोपियों की तलाश और आगे की जांच जारी है।

सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन के पास एमडी ड्रग्स के साथ मिला आरोपी

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– नाबालिग भी मिला साथ,1.25 लाख रुपये का माल जब्त

नागपुर :- क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने प्रतापनगर थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 11 ग्राम एमडी पाउडर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान न्यू निलडोह, एमआईडीसी निवासी अक्षय चंद्रशेखर यावलकर (29) के रूप में हुई है। उसके साथ एक नाबालिग बालक भी मिला, जिसे पूछताछ के बाद उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार, 24 सितंबर की रात करीब 2.10 बजे क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की टीम गश्त पर थी। इसी दौरान सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन से हिंगना टी-पॉइंट की ओर जाने वाले मार्ग पर एक एक्टिवा पर दो युवक संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिए। पुलिस ने दोनों को रोककर पूछताछ की। संदेह के आधार पर एनडीपीएस कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए तलाशी ली गई। तलाशी में अक्षय के पैंट की जेब से जिपलॉक पन्नी में 11 ग्राम एमडी पाउडर बरामद हुआ। पुलिस ने एमडी, दो मोबाइल फोन और एक्टिवा क्रमांक एमएच-31/ जीसी-5830, कुल करीब 1 लाख 25 हजार रुपये का माल जब्त किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह और नाबालिग यह एमडी महाजनवाड़ी निवासी फारूख शेख (20) से बिक्री के लिए लेकर आए थे। पुलिस ने अक्षय को आगे की कार्रवाई के लिए प्रतापनगर पुलिस के हवाले कर दिया है, जबकि फरार फारूख शेख की तलाश जारी है। मामले की जांच की जा रही है।

शुरू होते ही किशोर को निगल गया दिघोरी फ्लाईओवर

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– दर्दनाक हादसा: बुलेट की टक्कर से 13 वर्षीय साइकिल सवार की मौत

नागपुर :- इंदौरा-दिघोरी फ्लाईओवर शुरू होने के महज पांच दिन बाद एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। गुरुवार रात बड़ा ताजबाग परिसर के पास फ्लाईओवर पर तेज रफ्तार बुलेट ने साइकिल सवार 13 वर्षीय काशिफ जावेद सिद्दीकी को जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल काशिफ की उपचार के दौरान मौत हो गई। हादसे में बुलेट चालक विजय तिड़के भी घायल हुआ है।

पुलिस के अनुसार, पंचवटी आश्रम के पास आदर्श नगर निवासी काशिफ जावेद सिद्दीकी अपने तीन-चार दोस्तों के साथ रात में साइकिल से घूमने निकला था। रात करीब 10.30 बजे वह एसबीआई बैंक दिघोरी से भांडेप्लॉट की ओर जाने वाले फ्लाईओवर से गुजर रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही बुलेट क्रमांक एमएच-49/सीएन-5336 के चालक विजय तिड़के ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए काशिफ की साइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि काशिफ गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद फ्लाईओवर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। काशिफ को पहले यश अस्पताल और बाद में मेडिकल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के चाचा आफताब अहमद सिद्दीकी की शिकायत पर सक्करदरा पुलिस ने बुलेट चालक विजय तिड़के के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 281, 125(बी) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस उपनिरीक्षक कुणाल दिघावकर मामले की जांच कर रहे हैं।

बीच चौराहे पर 14 वर्षीय नाबालिग की हत्या

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– जरीपटका के जिंजर मॉल के पास पुराने विवाद में वारदात

– 10-12 हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज

नागपुर :- जरीपटका थाना क्षेत्र के जिंजर मॉल के पास गुरुवार रात पुराने विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष में 14 वर्षीय किशोर की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान गौतम नगर, जरीपटका निवासी आबिद उर्फ आबू रज्जाक शेख (14) के रूप में हुई है। हमले में उसका दोस्त अंतराल सिंह भी घायल हुआ है, जिसका मेयो अस्पताल में उपचार जारी है।

पुलिस के अनुसार, 24 सितंबर की रात करीब 9.35 बजे आबिद अपने दोस्त अंतराल सिंह, अमानत इकबाल शेख और अन्य साथियों के साथ जिंजर मॉल के पास मौजूद था। इसी दौरान करीब 10 से 12 युवक वहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि आबिद का दो-तीन महीने पहले पांचपावली निवासी सोहेल खान से विवाद हुआ था। इसी पुराने विवाद को लेकर आरोपियों ने आबिद और उसके दोस्तों से गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने पथराव और ईंटों से हमला किया। इसी दौरान आबिद पर धारदार हथियार से जानलेवा वार किए गए। हमले में वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। उसके दोस्त अंतराल सिंह पर भी हथियार से वार किया गया।

घटना की सूचना मिलते ही जरीपटका पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को उपचार के लिए मेयो अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, उपचार के दौरान डॉक्टरों ने आबिद को मृत घोषित कर दिया। मृतक की मां तबस्सुम रज्जाक शेख (34) की शिकायत पर जरीपटका पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या कि संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और वारदात में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

आपली बस’ ने पकड़ी डिजिटल रफ्तार

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– डिजिटल टिकटिंग में नागपुर महाराष्ट्र के अग्रणी शहरों में शामिल

नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका की ‘आपली बस’ सेवा में डिजिटल टिकटिंग को लेकर शहर ने नया मुकाम हासिल किया है। बस सेवा में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या करीब 2.37 लाख पहुंच गई है। इनमें 41.03 फीसदी से अधिक यात्री डिजिटल माध्यम से टिकट ले रहे हैं। इससे नागपुर डिजिटल टिकटिंग के मामले में महाराष्ट्र के अग्रणी शहरों में शामिल हो गया है।

महानगरपालिका परिवहन समिति की सभापति मंगला खेकरे, मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर, परिवहन व्यवस्थापक और परिवहन विभाग की टीम के प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। डिजिटल टिकटिंग से नकद लेन-देन कम होने के साथ किराया वसूली और राजस्व प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे राजस्व में संभावित लीकेज पर रोक लगाने और यात्रियों के बस में सवार होने की प्रक्रिया को तेज करने में भी मदद मिल रही है। परिवहन समिति की सभापति मंगला खेकरे ने कहा कि यह उपलब्धि नागपुर की जनता और ‘आपली बस’ के यात्रियों की है। उन्होंने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यात्रियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बस सेवा को और सुविधाजनक, विश्वसनीय तथा अधिक डिजिटल बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

डिजिटल भुगतान और टिकटिंग का उपयोग की अपील

खेकरे ने महापौर नीता ठाकरे, स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी-वखरे और सत्ता पक्ष नेता नरेंद्र बोरकर समेत मनपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मनपा ने नागरिकों से ‘आपली बस’ में यात्रा के दौरान अधिक से अधिक डिजिटल भुगतान और टिकटिंग का उपयोग करने की अपील की है।

944 पीओपी मूर्तियों में एक पर भी नहीं मिला लाल निशान

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– एनएमसी के कृत्रिम कुंडों में विसर्जन के आंकड़ों से सामने आई नियमों के पालन में कमी

नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका के कृत्रिम कुंडों में गणेश विसर्जन के दौरान अब तक 944 पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियों की पहचान हुई है, लेकिन इनमें से एक भी मूर्ति पर निर्धारित लाल निशान नहीं मिला। राज्य सरकार ने पीओपी मूर्तियों की पहचान के लिए निर्माताओं और विक्रेताओं को मूर्तियों के पीछे स्पष्ट रूप से लाल निशान लगाने के निर्देश दिए थे।

मनपा के आंकड़ों के अनुसार, 14 और 15 सितंबर को 2,079 मूर्तियों का विसर्जन हुआ, जिनमें 69 पीओपी की थीं। 16 सितंबर को 707 में से 33, 18 सितंबर को 1,417 में से 93 और 20 सितंबर को 4,550 में से 247 मूर्तियां पीओपी की थीं। 22 सितंबर को 2,286 मूर्तियों में 162 पीओपी की थीं। 23 सितंबर के 10वें दिन के आंकड़ों में 7,023 मूर्तियों का विसर्जन दर्ज किया गया। इनमें 6,683 मिट्टी और 340 पीओपी की मूर्तियां थीं। इस तरह अब तक कृत्रिम कुंडों में कुल 18,062 मूर्तियों का विसर्जन हुआ है, जिनमें 17,118 मिट्टी और 944 पीओपी की हैं।ग्रीन विजिल फाउंडेशन की टीम की प्रमुख सुरभि जायसवाल के अनुसार, फुटाला तालाब पर विसर्जन के दौरान कई पीओपी मूर्तियां बिना लाल निशान के मिलीं। कुछ श्रद्धालुओं ने स्वयंसेवकों को बताया कि विक्रेताओं ने उन्हें पीओपी मूर्तियों को मिट्टी की मूर्ति बताकर बेचा था।

मिलना निर्देशों के क्रियान्वयन पर सवाल

पीओपी मूर्तियों पर लाल निशान लगाने की व्यवस्था का उद्देश्य खरीदारी के समय ही श्रद्धालुओं को मूर्ति की सामग्री की पहचान कराने के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। मनपा के आंकड़ों में पीओपी मूर्तियों की संख्या भले कुल विसर्जन की तुलना में कम हो, लेकिन किसी भी मूर्ति पर निर्धारित लाल निशान नहीं मिलना निर्देशों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।