– दावेदारों की जोरदार लॉबिंग
– समिति में जगह न मिलने से वरिष्ठ नगरसेवक नाराज
नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका में सत्ता तो बन गई, लेकिन स्थायी समिति को लेकर सियासी घमासान अब खुलकर सामने आ गया है. पद, प्रभाव और पैसों की ताकत वाली इस समिति के लिए अंदरखाने ऐसा दबाव बना कि तय घोषणा भी ऐन वक्त पर टालनी पड़ी. नागपुर महानगरपालिका में स्थायी समिति के गठन को लेकर सत्तापक्ष के भीतर ही जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है. महापौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थायी समिति के 16 सदस्यों की घोषणा होनी थी, लेकिन दावेदारों के दबाव और गुटबाजी के चलते फैसला टाल दिया गया.
स्थायी समिति को मनपा की सबसे ताकतवर समिति माना जाता है, जहां जगह मिलने का मतलब विकास निधि, ठेके और फैसलों में सीधा दखल है. यही वजह है किसत्तापक्ष के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली पार्षद खुलकर लॉबिंग में जुटे हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि पहले सभापति और विषय समितियों के सभापतियों के नाम तय कर अपने-अपने गुटों को संतुलित करने की रणनीति पर काम हो रहा है. इसी सियासी गणित के चलते 16 सदस्यों की सूची फिलहाल फाइलों में ही दबाकर रख दी गई है. पिछले कार्यकाल में पांच पार्षदों को स्थायी समिति सभापति बनने का मौका मिला था, जिससे इस बार भी उम्मीदों की कतार लंबी है. दो-दो, तीन-तीन बार चुने गए पार्षद खुलकर कह रहे हैं, अगर इस बार भी समिति से बाहर रहे तो पार्टी के भीतर असंतोष बढऩा तय है.
दबाव और गुटबाजी के चलते फैसला टाल दिया
महापौर पद पर भले ही भाजपा ने कब्जा कर लिया हो, लेकिन स्थायी समिति पर किस गुट का दबदबा रहेगा, यह सवाल अब भी अधर में है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थायी समिति की घोषणा के साथ ही सत्तापक्ष की अंदरूनी राजनीति पूरी तरह उजागर हो जाएगी. अब सबकी नजरें मनपा की अगली बैठकपर टिकी हैं, जहां या तो नामों की घोषणा होगी, या फिर दबाव की राजनीति एक बार फिर जीत जाएगी.








