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नए शैक्षणिक वर्ष में स्कूल बसों और वैन की बढ़ेंगी कीमतें

– ईंधन दामवृद्धि से छात्रों की यात्रा प्रभावित

 नागपुर :- ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब छात्रों के दैनिक आवागमन पर दिखने लगा है. नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के साथ ही शहर और जिले के स्कूल बस और वैन चालकों ने किराया बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पडऩे की संभावना है. अनुमानित 15० से 2०० रुपये प्रति माह की वृद्धि के साथ, छात्रों पर परिवहन का बोझ शिक्षा की लागत के साथ-साथ बढ़ जाएगा.

वर्तमान में, शहर में एक छोटी चार पहिया स्कूल वैन का मासिक शुल्क लगभग 12०० रुपये है, जबकि एक बड़ी स्कूल बस का शुल्क 14०० रुपये से 15०० रुपये के बीच है. हालांकि, डीजल और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण, वाहनों के रखरखाव का खर्च भी बढ़ रहा है.

स्कूल की फीस, किताबें, यूनिफॉर्म, नोटबुक और अन्य शैक्षिक खर्चों के भुगतान की आवश्यकता के कारण आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है.. मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. इसके अलावा, परिवहन शुल्क में वृद्धि से दो या दो से अधिक ब’चों वाले परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है. इसी बीच, कई स्कूलों ने निजी स्कूल बस चालकों के साथ वार्षिक अनुबंध कर लिए हैं.

स्कूल बस चालक कहते हैं कि बीमा, फिटनेस, टैक्स और बैंक की किश्तों की बढ़ती लागत के कारण मौजूदा दरों पर सेवाएं देना मुश्किल हो रहा है. स्कूल बस ड्राइवरों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में परिवहन लागत में काफी वृद्धि हुई है. छात्रों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा लागू किए गए नियम भी महंगे साबित हो रहे हैं. सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, स्पीड कंट्रोलर, अग्निशामक यंत्र और महिला अटेंडेंट रखना अनिवार्य कर दिया गया है. इन सभी सुविधाओं का खर्च बस ड्राइवरों को उठाना पड़ता है.

हालांकि, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण, इस समझौते में फिर से बदलाव करने का समय आ सकता है. इसलिए, स्कूल प्रशासन को परिवहन व्यवस्था के लिए एक नई गणना भी करनी होगी. यदि परिवहन शुल्क बढ़ता है, तो कई अभिभावकों को अपने ब’चों को स्वयं दोपहिया या चार पहिया वाहनों से स्कूल ले जाना पड़ेगा.

वे स्कूल छोडऩे का विकल्प चुन सकते हैं. इसके परिणामस्वरूप, सुबह और शाम के समय स्कूलों के बाहर यातायात जाम बढऩे की संभावना है.

इससे यातायात जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढऩे की आशंका है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्कूल बस का किराया बढ़ता है, तो कुछ माता-पिता सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं. इसमें अनधिकृत बसें भी शामिल हैं.

परिवहन वाहनों की संख्या में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. चूंकि ऐसे वाहनों में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता है, इसलिए छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है. परिवहन पेशेवरों ने मांग की है कि सरकार को बस चालकों के लिए ईंधन में छूट, कर में छूट या विशेष सब्सिडी पर विचार करना चाहिए.

किराया बढ़ाना जरूरत है, मनमानी नहीं – गौरव वानखेड़े

मौजूदा हालात में पुरानी दरों पर सेवाएं देना नामुमकिन हो गया है. डीजल की कीमतें, वाहन मरम्मत, बीमा, फिटनेस और बैंक की किश्तें लगातार बढ़ रही हैं. इसके अलावा, सरकारी सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए सीसीटीवी, जीपीएस और महिला सहायकों को भी तैनात करना पड़ रहा है. इन सभी खर्चों का बोझ ड्राइवरों पर ही पड़ता है. स्कूल वैन चालक गौरव वानखेड़े ने कहा, किराया बढ़ाना हमारा शौक नहीं, बल्कि धंधा चलाने की मजबूरी है. यह भी पता चला है कि कुछ ड्राइवर खर्चों को पूरा न कर पाने के कारण अपने वाहन बेचने की सोच रहे हैं.

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