– गांधीजी की प्रेरणा से 1931 में स्थापित हुई थी संस्था
वर्धा :- शहर में महात्मा गांधी की प्रेरणा से सन 1931 में स्थापित गोरस भंडार पर रविवार को नागपुर और वर्धा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की संयुक्त टीम ने छापा मारकर मिलावट के संदेह दूध व दुग्धजन्य पदार्थ जब्त किए। जब्त किए गए नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए। इस कार्रवाई से विश्व स्तर पर पहचान बना चुकी इस संस्था पर सवालिया निशान लग गए हैं। एफडीए ने छापे में 25 लाख 86 हजार 168 रुपए मूल्य के संदिग्ध और असुरक्षित दुग्ध उत्पादों उत्पादों का भंडार जब्त किया गया और उक्त प्रतिष्ठान को तत्काल बंद करने का आदेश देकर सील कर दिया।
जानकारी के अनुसार खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नागपुर कार्यालय को मिली गोपनीय और विश्वसनीय सूचना के आधार पर इस बड़े अभियान की योजना बनाई गई थी। प्रशासन के खाद्य सुरक्षा अधिकारी राउत और राहुल खंडागले (नागपुर) और खाद्य सुरक्षा अधिकारी रविराज धबार्डे की संयुक्त टीम ने वर्धा के मगनवाड़ी स्थित गोरस भंडार के उत्पादन केंद्र का अचानक दौरा किया और गहन निरीक्षण किया। टीक के अनुसार निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उक्त स्थान पर खाद्य पदार्थों का उत्पादन अत्यंत असुरक्षित, अस्वच्छ और खाद्य
कानून का उल्लंघन करने वाले वातावरण में किया जा रहा था। अभियान के दौरान, यह पाया गया कि गाय का दूध, घी, छाछ और खोवा बड़ी मात्रा में बिक्री और भंडारण के लिए उपलब्ध थे। टीम को इस भंडार पर अत्यधिक संदेह होने पर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी रविराज धबार्डे ने तुरंत विश्लेषण के लिए चारों खाद्य पदार्थों के कानूनी नमूने जब्त कर लिए।
बता दें कि 1931 में महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जमनालाल बजाज के मार्गदर्शन में स्थापित गोरस भंडार केवल एक दुग्ध संस्था नहीं, बल्कि वर्धा की ऐतिहासिक पहचान और किसानों की जीवनरेखा कही जाती है। इस पर 15 गांवों के 600 किसानों की आजीविका निर्भर है। गोरस भंडार वर्धा के अध्यक्ष एड. नीलेश पाटील ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना सैंपल की रिपोर्ट आए मुख्यालय सील करने से कई सवाल कड़े हो रहे हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। आज पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर से हम किसानों के साथ मुलाकात करेंगे।



