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पहली किस्त का प्रचार, आगे की सब्सिडी गायब : मौदा में PM आवास के घर अधूरे

– तीन महीने से रुका निर्माण, दुकानदार दरवाज़े पर: घरकुल लाभार्थी परेशान

– शहर को ज़्यादा, गांव को कम? PM आवास सब्सिडी में भेदभाव पर सवाल

मौदा :- राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त हजारों लाभार्थियों को एक साथ दे दी। इसका खूब प्रचार किया गया। जबकि, सब्सिडी न मिलने के कारण तीन महीने से घरों का निमार्ण कार्य रुका हुआ है और लाभार्थी परेशान हैं। अधिकारी सब्सिडी कब आएगी, इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं। सरकार पिछले कई वर्षों से जरूरतमंदों को घर उपलब्ध कराने के लिए घरकुल का प्रचार कर रही है। इसके जरिए कुछ लोगों के घर के सपने पूरे भी हुए हैं। लेकिन कुछ पैसे भी लाभार्थी हैं जिन्हें सरकार की ओर से कोई सब्सिडी नहीं मिली है। अधिकांश लाभार्थियों की दुसरी और तीसरी किस्त अटकी हुई है। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए फॉलोअप जारी है। सब्सिडी में यह अंतर क्यों? सरकार इस बात का भी जवाब नहीं दे रही है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों के लिए घर बनाने की योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी में अंतर क्यों है?

ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों को लगभग 1 लाख 58 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों के लाभार्थियों को लगभग ढाई लाख रुपये मिल रहे हैं। घर बनाने के लिए आवश्यक अधिकांश सामग्री शहर से ही लानी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों को परिवहन का अधिक खर्च उठाना पड़ता है। मांग है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों को भी शहरी क्षेत्रों के लाभार्थियों के समान सब्सिडी दी जाएं। आमतौर पर, घर की किश्तें काम देखने के बाद हर पखवाड़े किस्तों में दी जाती थीं। कभी-कभी देरी भी हो जाती थी। नियमित किश्तें मिल रही थीं। इसलिए, कुछ लाभार्थियों ने घर बनाने के लिए उधारी पर सामग्री लाने के लिए जद्दोजहद की, हालांकि, इस बार घर निर्माण शुरू होने के लगभग तीन महीने बाद भी कई लोगों को सब्सिडी नहीं मिली है। सब्सिडी न मिलने के कारण कुछ घरों का निर्माण अधूरा रह गया है। लाभार्थी सरकार से सब्सिडी की राशि तुरंत उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

घर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री एक-दो महीने के लिए दुकान से उधार ली गई थी। हालांकि, चार महीने बीत जाने के बाद भी किश्त की राशि नहीं मिली है। इसलिए अब वे दुकानदार लाभार्थियों के घरों के बाहर मंडरा रहे हैं। स्थानीय प्रतिनिधियों को सब्सिडी के मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। अपने परिवार के लिए घर बनाना हर आम आदमी का सपना होता है। लेकिन हर कोई मकान को लगने वाली धनराशि वहन नहीं कर सकता। आर्थिक तंगी के कारण कई लोगों को घर बनाने का सपना अंत तक टालना पड़ता है।

मौदा के समूह विकास अधिकारी महेश बेहेकर ने इसके बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि लक्ष्मण शालिकराम बुलबुले, लाभार्थी, खंडाला (पिपरी), तहसील मौदा, नवंबर-दिसंबर 2025 प्रधानमंत्री आवास घरकुल के लिए धनराशि उपलब्ध थी, लेकिन नई एस.एन.एस. स्पर्श प्रणाली अपनाने के कारण इसके कार्यान्वयन में थोड़ी देरी हुई। अब सब्सिडी जल्द ही घरकुल लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होना शुरू हो जाएगी।

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