– तीन दलों के खिलाफ FIR; स्पेशल सेल करेगी जांच
नई दिल्ली :- जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान संसद मार्च में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की जांच में राजनीतिक साजिश का एंगल सामने आया है। पुलिस की ओर से दर्ज एक एफआईआर में आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी और भीम आर्मी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और पुलिस ने इस संबंध में ठोस निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के लिए एफआईआर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया गया है। शुरुआती जांच संसद मार्ग थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस जल्द ही संबंधित राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर पूछताछ कर सकती है। संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में संसद मार्ग थाने में इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर एक एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एफआईआर में हिंसा को सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया गया है। संसद मार्ग थाने में हिंसा से जुड़े कुल 21 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से संबंधित एफआईआर में कथित आपराधिक साजिश, दंगा, पुलिसकर्मियों पर हमला और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत धाराएं लगाई गई हैं।
CCTV और डिजिटल सबूतों की जांच
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सबूतों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। जांच में आप, सपा और भीम आर्मी से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। एफआईआर में कथित तौर पर कहा गया है कि 16 मई को सीजेपी के गठन से लेकर 20 जुलाई की सुबह तक आप से जुड़े नेताओं ने भीड़ को संबोधित किया। पुलिस का आरोप है कि इन भाषणों के बाद भीड़ का एक हिस्सा आक्रामक हुआ और सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है।
पुलिस के अनुसार, अब तक जुटाए गए दस्तावेज, डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया सामग्री से प्रथम दृष्टया संगठित योजना और आपराधिक साजिश की आशंका सामने आई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि प्रदर्शन के लिए कथित तौर पर वित्तीय सहायता कहां से उपलब्ध कराई गई।
भीड़ को उकसाने का भी आरोप
एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई की सुबह सीजेपी अध्यक्ष के संसद मार्च के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। पुलिस का आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने लोगों को सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पुलिसकर्मियों पर हमला किए जाने का आरोप है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 61 (आपराधिक साजिश), 191(2), 191(3) (दंगा और घातक हथियारों से लैस होना), 181 (गैरकानूनी सभा) और 121 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए गंभीर चोट पहुंचाना) सहित अन्य धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 (1एबी) और दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 3 समेत अन्य प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच स्पेशल सेल द्वारा की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।





