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रोज़गार की गारंटी अब नहीं, केंद्र की मर्ज़ी चलेगी

– 125 दिन रोजगार का दावा भ्रामक, नेशनल हेराल्ड केस में बदले की राजनीति

नागपुर :- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक दत्त ने आरोप लगाया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीए) की जगह लागू किए गए जी-र्रामजी कानून ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी समाप्त कर दी है और अब यह योजना केंद्र सरकार की मनमानी पर निर्भर है.

उन्होंने आगे कहा कि, पहले, ग्राम पंचायत या जिला परिषद के माध्यम से काम की मांग प्राप्त होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान किया जाता था. हालांकि, नए कानून के अनुसार, किस राज्य, जिले और गांव में रोजगार दिया जाना चाहिए, यह तय करने का पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास है. दत्त ने स्पष्ट किया कि मांग के आधार पर रोजगार प्रदान करने की अवधारणा समाप्त हो गई है. जी-रामजी कानून के अनुसार, योजना के वित्त फंड में भी एक बड़ा बदलाव किया गया है. पहले केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 9० प्रतिशत और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 1० प्रतिशत थी. अब केंद्र सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 6० प्रतिशत और राज्यों की हिस्सेदारी घटाकर 4० प्रतिशत कर दी गई है. उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र ने अपनी वित्तीय जिम्मेदारी कम कर दी है, वहीं दूसरी ओर योजना को लागू करने का पूरा अधिकार अपने पास रखा है.

इस कानून में कृषि मौसम के दौरान 6० दिनों तक रोजगार न देने की शर्त है. इसके चलते ग्रामीण श्रमिकों को इस अवधि में रोजगार नहीं मिलेगा और उनके आर्थिक शोषण की संभावना बढ़ जाएगी. दत्त ने कहा कि इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के अकुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों पर पड़ेगा.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई है. हालांकि कानून में 1०० दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में केंद्र सरकार ने 2०19 से 2०24 की अवधि के दौरान औसतन किसी को भी 42 दिनों से अधिक का रोजगार नहीं दिया है. इसलिए, 125 दिनों के रोजगार की घोषणा मात्र भ्रामक है. जीएसटी से राज्यों की आय घट गई है और कई राज्य भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं. महाराष्ट्र पर सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, जबकि गरीब राज्यों की हालत और भी बदतर है. ऐसे में राज्यों के लिए रोजगार सृजन पर खर्च करना संभव नहीं होगा. इसके परिणामस्वरूप, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर युवाओं का पलायन बढ़ेगा, दत्त ने यह चेतावनी भी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की मूल अवधारणा को कमजोर करता है और यह योजना रोजगार की गारंटी दिए बिना तैयार की गई थी और पूरी तरह से केंद्र के नियंत्रण में थी.

2०13 में, भाजपा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार और कांग्रेस को बदनाम करने के लिए अदालत में शिकायत दर्ज की थी. इस मामले में पुलिस में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी. इन्हीं कारणों से अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. ईडी ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे से कई घंटों तक पूछताछ की. अभिषेक दत्त ने आरोप लगाया कि, भाजपा और केंद्र में मोदी सरकार राजनीतिक बदले की भावना से गांधी परिवार और कांग्रेस नेताओं को परेशान कर रही है.


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