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गांवों की ओर आ रही बाघिन ‘TUI-21’ का सुरक्षित रेस्क्यू

– स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सिल्लारी के कोर क्षेत्र में छोड़ा गया

देवलापार :- मानव–वन्यजीव संघर्ष की संभावित घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से पेंच टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रशासन ने मंगलवार को विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर गांवों के आसपास लगातार दिखाई दे रही मादा बाघिन ‘TUI-21’ को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया। स्वास्थ्य परीक्षण में पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे नियमानुसार सिल्लारी रेंज के कोर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अनुसार, यह बाघिन पिछले कुछ समय से बार-बार मानव बस्तियों के समीप देखी जा रही थी। बीते आठ दिनों के दौरान उसने डोगरताल क्षेत्र में 20 से 25 बकरियों का शिकार किया था। इसके अलावा उसरीपार गांव में भी मवेशियों पर हमले की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के चलते क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेंच टाइगर रिजर्व प्रशासन ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाने का निर्णय लिया। रेस्क्यू टीम ने पवनी यूनिट के उसरीपार बीट में बाघिन का सफलतापूर्वक पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ा। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई और उसे जंगल में छोड़े जाने के लिए फिट घोषित किया गया। पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे अभियान को योजनाबद्ध और सावधानीपूर्वक अंजाम दिया।

इस अभियान का मार्गदर्शन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एम. एस. रेड्डी, पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एस. रमेश कुमार तथा उप संचालक अक्षय गजभिए ने किया। अभियान में सहायक वन संरक्षक पूजा लिंबगांवकर, वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिजीत माने एवं निलेश गावंडे, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोहिणी बावस्कर, सहायक पराग भुते सहित वन विभाग के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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