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पारंपरिक जल स्रोतों को बचाएं – पद्मश्री उमाशंकर पांडे

– नागपुर में जल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन 

नागपुर :- दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), नागपुर केंद्र एवं नागपुर जलप्रेमी जलदूत समूह व जलयोद्धा डॉ. प्रवीण डबली के संयुक्त तत्वावधान में जल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन उत्तर अंबाझरी रोड स्थित संस्थान परिसर में किया गया। कार्यशाला में जिले भर से आए लगभग 120 जलदूत, जलप्रेमी, सरपंच एवं ग्राम सचिवों ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इस प्रकार की बैठक पहली बार आयोजित की गई।

कार्यशाला के अध्यक्ष दी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर (इंडिया) के संदीप श्रीरखेडकर, विशेष अतिथि पद्मश्री उमाशंकर पांडे, पद्मश्री सेठपाल सिंह, सरकारी टेल डॉट कॉम के अमेय साठे, जल अभ्यासक, जल योद्धा, नर्व स्टीमूलेशन थेरेपिस्ट डॉ. प्रवीण डबली, आर्ट ऑफ लिविंग के मनीष बदीयानी, उमेश निनावे प्रमुखता से उपस्थित थे।

कार्यशाला का मुख्य विषय नदी, नालों एवं कुओं का गहरीकरण तथा पुनर्जीवन के माध्यम से जल संरक्षण था। इस दौरान नागपुर जिले के सभी तालुका एवं गांवों में जल स्रोतों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई और सर्वसम्मति से तालाब गहरीकरण तथा कुओं के पुनर्जीवन का कार्य जनसहयोग से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने अपने संबोधन में जलदूतों और जलप्रेमियों को भगीरथ की संज्ञा देते हुए जल संरक्षण को जीवन रेखा बताया। उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक पानी का महत्व बना रहता है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में हम पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं और तालाबों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आज पानी बोतलों में बिकने लगा है, जो समाज के लिए चिंताजनक संकेत है। साथ ही उन्होंने नागपुर जिले में चल रहे भूजल संवर्धन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने “खेत में मेढ़, मेढ़ पर पेड़” का मंत्र बताया। साथ ही खेत की मिट्टी खेत में, खेत का पानी खेत में, वर्षा की हर बूंद बचाने का आवाहन किया।

कार्यक्रम में पद्मश्री सेठपाल सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए जल संरक्षण के साथ जंगलों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कम पानी में खेती के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. प्रवीण डबली ने बताया कि जलदूत एवं जलप्रेमी समूह के माध्यम से नागपुर जिले में शीघ्र ही तालाब गहरीकरण और कुओं के पुनर्जीवन का व्यापक अभियान जनसहयोग से शुरू किया जाएगा। उन्होंने इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. संदीप शिरखेडकर ने नक्शों के माध्यम से जिले के विभिन्न जल स्रोतों की जानकारी देते हुए बताया कि किस क्षेत्र में नदी, नाले और तालाब स्थित हैं तथा उनके पुनर्जीवन की दिशा में कैसे कार्य किया जा सकता है। वहीं मनीष बदियानी ने तालुका स्तर पर तालाबों की जानकारी एकत्रित करते हुए उनके गहरीकरण के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

इस कार्यशाला में विशेष रूप से सरपंच रूपेश श्रीरामे (तास, भिवापुर), सरपंचा संगिता वासनिक (वरोडा, कळमेश्वर), सरपंचा पुष्पा येडमे (चिखलगढ़, काटोल), फेटरी ग्राम पंचायत के सदस्य वकील डोंगरे सहित विभिन्न गांवों के सरपंच, पूर्व बीडीओ एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम की प्रस्तावना उमेश निनावे ने प्रस्तुत की, सूत्रसंचालन नलिनी शेरकुरे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दिलीप दिवटे एवं कविता चौधरी ने किया। नागपुर, वर्धा तथा आसपास के क्षेत्रों से आए जलदूतों ने बड़े उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।


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