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सालेकसा में महिला एवं बाल विकास विभाग पर गंभीर सवाल

– पोषण आहार योजना में अनियमितता के आरोप

यासीन शेख, गोंदिया सालेकसा :- महाराष्ट्र के अतिदुर्गम और छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश सीमा से सटे सालेकसा तालुका में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग के प्रभारी अधिकारी मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और आंगनवाड़ी सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है.

जानकारी के अनुसार संबंधित प्रभारी महिला बाल विकास अधिकारी सालेकसा मुख्यालय में निवास न कर आमगांव से अप-डाउन कर रहे हैं. शासन के नियमों के मुताबिक अधिकारियों का मुख्यालय में रहना अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि न केवल अधिकारी बल्कि अधीनस्थ कर्मचारी और पर्यवेक्षिकाएं भी मुख्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते. कुछ मामलों में कथित रूप से निवास प्रमाणपत्र लगाकर घरभाड़ा भत्ता लेने की भी चर्चा है, जिसकी जांच की मांग की जा रही है.

इधर आंगनवाड़ी केंद्रों में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मिलने वाले पोषण आहार पर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि कई स्थानों पर निर्धारित दैनिक मेन्यू के अनुसार आहार नहीं दिया जा रहा और फर्जी बिलों के माध्यम से शासन को गुमराह किया जा रहा है.विशेष रूप से A. P. J. Abdul Kalam अमृत आहार योजना के अंतर्गत मिलने वाले पोषण आहार में कमी की शिकायतें सामने आई हैं.जानकारी के अनुसार प्रति लाभार्थी प्रतिदिन 45 रुपये की दर से पोषण आहार दिया जाना है, लेकिन कई गांवों में लाभार्थियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा.

कडोतीटोला, सातगांव, रुंगाटोला, लिंबाटोला, बीजेपार नं. 01-02, केहरीटोला, लोहारा नं. 01, तिरखेडी, ढिवरटोली, ईशनाटोला, शिंदीटोला नं. 01-02, दरेकसा, रोंढा, कावराबांध और लटोरी बिट सहित कई क्षेत्रों में अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं. कुछ स्थानों पर बेबी केयर किट के नाम पर राशि वसूले जाने के भी आरोप लगाए गए हैं. दरेकसा–रोंढा बिट में बड़ी संख्या में लाभार्थी इसी योजना के अंतर्गत बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई आंगनवाड़ी केंद्रों में मेन्यू प्रदर्शित नहीं है, सेविकाएं समय पर उपस्थित नहीं होतीं और निगरानी व्यवस्था कमजोर है. बचत समूहों की मौजूदगी के बावजूद पारदर्शिता का अभाव बताया जा रहा है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है.

इस संदर्भ में जब जिला प्रशासन से संपर्क किया गया.एम. मृंगनाथन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला परिषद गोंदिया ने कहा कि यदि कहीं भी निर्धारित मेन्यू के अनुसार पोषण आहार नहीं दिया जा रहा है या योजना का लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है, तो मामले की जांच कर संबंधित कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल क्षेत्र में पूरे प्रकरण

की उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है. नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो बच्चों और माताओं को मिलने वाला पोषण आहार कागजों तक ही सीमित रह जाएगा. अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं.

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