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‘सहमति से बने शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं’,

– महिला के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

कोलकाता :- कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक पुरुष पर महिला की तरफ से लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों की सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में अदालत ने कहा है कि अगर शादी नहीं हो पाती है और रिश्ते टूट गया है, तो सिर्फ इसलिए ही आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा होना चाहिए था। जज ने आगे कहा कि जिस तरह से दोनों (महिला और पुरुष) व्यवहार कर रहे थे, उससे दोनों की आपसी सहमति के संकेत मिल रहे थे।

जानकारी के अनुसार, बीते सोमवार (16 फरवरी) को हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस रद्द कर दिया। शख्स पर आरोप थे कि उसने शादी का वादा कर महिला के साथ दुष्कर्म किया और जबरन गर्भपात भी कराया है। इस मामले में जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) की बेंच ने कहा कि जब दोनों साथ में घूमे और पति पत्नी की तरह रहे। ऐसे में यह आपसी सहमति दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि शुरुआत से ही धोखा देने या गलत इरादा होना चाहिए था, इसके तहत महिला को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया गया हो।

मामले में जज ने आगे टिप्पणी की कि जो रिश्ता साल 2017 में शुरू हुआ और 2022 में कड़वाहट आने तक जारी रहा। इस रिश्ते के दौरान, दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए और तमाम जगहों पर घूमे और कई होटलों में पति-पत्नी की भी तरह रहे। दोनों ने यह भी स्वीकार किया गया है कि महिला गर्भवती हो गई थी और पीड़िता और आरोपी की सहमति से गर्भपात कराया गया था।’ उन्होंने कहा, ‘आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत करने के बजाए महिला ने रिश्ता जारी रखा। ऐसे में किसी भी तरीके से यह साफ नहीं होता कि महिला बीते पांच या छह वर्षों से किसी भी तरह की गलतफहमी में थी।’

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