– मनपा चुनाव में बड़ा उलटफेर
– 2017 की जीत वाला फार्मूला फिर आज़माया : पुराने चेहरों की छुट्टी
नागपुर :- महायुति की घोषणा किए बगैर भाजपा की तरफ से सोमवार की शाम तक 80 से 90 उम्मीदवारों को पार्टी की तरफ से हरी झंडी दे दी गई. साथ ही एबी फार्म भी जारी कर दिया गया. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय की तरफ से मनपा चुनाव के लिए चयनित उम्मीदवारों को फोन किया जाने लगा. जिसके भी नाम फाइनल हुए, उन्होंने एबी फार्म ले लिया. मंगलवार की सुबह भाजपा के नेता अपना नामांकन भरेंगे. सबकी नजर मंगलवार पर है, जब भाजपा की असली सूची किसी घोषणा से नहीं, बल्कि चुपचाप रिटर्निंग ऑफिसरों की मेज पर दिखाई देगी.
चर्चा यह है कि 60 फीसदी के करीब पूर्व पार्षदों की टिकट काटी गई है. भाजपा की तरफ से उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी नहीं करते हुए फोन कर सीधे एबी फार्म देने की रणनीति अपनाई गई. ताकि अंतिम समय में बगावत, दबाव की राजनीति और नाराज दावेदारों द्वारा स्वतंत्र रूप से नामांकन दाखिल करने की संभावना को रोकने के लिए उठाया गया है.पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी, नंदा जिचकार, पूर्व उपमहापौर दीपराज पारडर्डीकर, पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष अविनाश ठाकरे, प्रकाश भोयर, संजय बंगाले, चेतना टांक सहित कई वरिष्ठों को उनके पूर्व प्रभाग से टिकट नहीं दी गई. दयाशंकर तिवारी व अविनाश ठाकरे इस बार चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं. पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी चार बार पार्षदएबी फॉर्म लेते हुए भाजपा उम्मीदवार. रहे. नंदा जिचकार, अर्चना डेहनकर का नाम भी घोषित नहीं किया गया. प्रभावशाली नेताओं जैसे संजय बंगाले और चेतना टांक प्रभाग स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वालों के नाम भी इस बार कट गए. प्रभाग 4 से भाजपा ने इस बार मनीषा अतकरे, रामदास साहू, शेषराव गोतमारे, निरंजना पाटिल को टिकट दी है. राजकुमार सेलोकर का टिकट काटा गया. प्रभाग 23 से बाल्या बोरकर, संतोष लड्डा, अर्चना पडोले, बाल्या रारोकर को टिकट दिया गया. मनीषा धावड़े, कोता रारोकर को टिकट नहीं मिल पाया. प्रभाग 24 से प्रदीप पोहाणे, अरुण हारोडे, सरिता कावरे, दुर्गेश्वरी कोसेकर को टिकट दिया गया.
नए चेहरों पर भाजपा का भरोसा
इस प्रभाग से चेतना टांक, अनिल गेंडरे का पत्ता कटा. प्रभाग 26 से धर्मपाल मेश्राम, सीमा ढोमणे, शारदा सुरेश बारई, जितेंद्र उर्फ बंटी कुकड़े का नाम तय हुआ. इस प्रभाग से मनीषा कोठे और समिता चकोले का टिकट काटा गया.एंटी इंकम्बेंसी से बचने का कर रहे प्रयास कई प्रभागों में नए चेहरे उतारे गए हैं ताकि एंटी-इंकम्बेसी को कम किया जा सके. वहीं, बकुछ जगहों पर अनुभवी पार्षदों को बनाए रखा गया है जहां संगठन को वफादारी और कामकाज का भरोसा है. इस फेरबदल से कार्यकर्ताओं में असंतोष की हल्की सरगर्मी दिख रही है. 2017 के मनपा चुनाव में उसने अपने 62 में से 26 मौजूदा पार्षदों को टिकट नहीं दिया था, फिर भी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी. 151 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी. कांग्रेस 29 पर सिमट गई, बसपा को 10, एनसीपी को 1 और शिवसेना को 2 सीटें मिलीं.




