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सोते समय 500 छात्रों के बाल काटे

– चंद्रपुर के जांभुलघाट आश्रम स्कूल का मामला, अभिभावकों में नाराजगी, जांच की मांग

नागपुर/चंद्रपुर :- विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी वाले जांभुलघाट तह. चिमूर स्थित शासकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में छात्रों के बाल काटने के कथित मामले से अभिभावकों में नाराजगी है। स्कूल में कक्षा पहली से 11वीं तक करीब 572 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें से करीब 500 विद्यार्थियों के बाल काटे जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि कुछ विद्यार्थियों के बाल रात में सोने के समय भी काटे गए। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 3 बजे विद्यार्थियों की कटिंग शुरू की गई। इसके बाद रात करीब 11 बजे दोबारा बाल काटने का काम शुरू होने और सुबह करीब 4 बजे तक जारी रहने का आरोप है। इससे विद्यार्थियों में भय का माहौल बनने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में आश्रमशाला के अधीक्षक प्रशांत आत्राम पर भी आरोप लगाए गए हैं। उन पर नशे की हालत में होने और बाल काटने वाले व्यक्ति पर दबाव डालकर विद्यार्थियों की कटिंग कराने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अधीक्षक ने आरोपों को नकारा

अधीक्षक प्रशांत आत्राम ने आरोपों को खारिज किया है। उनके अनुसार, आश्रमशाला के विद्यार्थियों की हर महीने कटिंग कराई जाती है। इस बार स्टीमर की मदद से बाल काटे जा रहे थे, लेकिन उसकी बैटरी खत्म होने के कारण कुछ विद्यार्थियों की कटिंग अधूरी रह गई। इसे पूरा करने के लिए दोबारा नाई को बुलाया गया था। इसी दौरान अधूरी कटिंग वाले कुछ विद्यार्थियों के फोटो प्रसारित होने के बाद कार्यालय से फोन आया और आगे की प्रक्रिया रोक दी गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले के पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी।

वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग

अभिभावकों ने आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की तत्काल जांच की मांग की है। अधिकारियों को आश्रमशाला का दौरा कर विद्यार्थियों के स्वतंत्र रूप से बयान दर्ज करने, अभिभावकों से बातचीत करने तथा संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ करने की मांग की गई है। यदि रात के समय विद्यार्थियों के बाल काटे गए, तो यह निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।

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