– पांच जिलों के शिक्षक आंदोलन में शामिल, भूख हड़ताल की चेतावनी
नागपुर :- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को वापस लेने की मांग को लेकर गुरुवार को नागपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (डीबाटो) के नेतृत्व में हुए आंदोलन में नागपुर, भंडारा, चंद्रपुर, गोंदिया और वर्धा जिलों के शिक्षक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘रोल बैक एनईपी’ के नारे लगाते हुए विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु अखिलेश पेशवे और प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाल को ज्ञापन सौंपा।
डीबाटो ने इससे पहले 12 अक्टूबर को ज्ञापन देकर सरकार से 25 अक्टूबर तक एनईपी के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा था। संगठन के अनुसार, कोई ठोस जवाब नहीं मिलने के कारण आंदोलन करना पड़ा। शिक्षकों का आरोप है कि नीति लागू करते समय शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार, रिक्त पदों, ग्रामीण कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डीबाटो के अध्यक्ष एवं सीनेट सदस्य ओमप्रकाश चिमणकर ने कहा कि शिक्षकों का कार्यभार स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए और अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यक मंजूरी और बदलावों के बिना शिक्षक अगले शैक्षणिक सत्र से एनईपी के तहत शुरू किए गए विषयों और अतिरिक्त कक्षाओं का दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे।
यंग टीचर्स एसोसिएशन के समन्वयक एवं सीनेट सदस्य बबनराव तायवाडे ने कहा कि विद्यार्थियों के हित में पहले शिक्षकों का कार्यभार तय कर रिक्त पदों पर पूर्णकालिक नियुक्तियां की जानी चाहिए। डीबाटो के सचिव एवं सीनेट सदस्य श्रीकांत भोवते ने कहा कि कई कॉलेजों में नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं और शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। नागपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (नूटा) के सचिव नितिन कोंगरे ने मांग की कि समस्याओं का समाधान होने तक एनईपी का क्रियान्वयन रोका जाए।
आंदोलन को यंग टीचर्स एसोसिएशन, नूटा, मासवे, नूपेटा और भीमाची लेकर सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों ने समर्थन दिया। सीनेट सदस्य मनमोहन बाजपेयी, प्रिंसिपल फोरम के अध्यक्ष प्रो. बंडू नाईक, प्रो. अजीत श्रृंगारपुरे, डीबाटो के नागपुर शहर अध्यक्ष विनोद राऊत, जिलाध्यक्ष नितिन मेश्राम और उपाध्यक्ष राष्ट्रपाल मेश्राम सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो डीबाटो श्रृंखलाबद्ध भूख हड़ताल शुरू करेगा।








