– राष्ट्रीय महामार्ग बने ज्यादा खतरनाक, राज्य मार्गों से दोगुनी मौतें
– समृद्धि महामार्ग पर बढ़ते हादसे: 491 दुर्घटनाओं में 444 लोगों की मौत
नागपुर :- महाराष्ट्र में सड़कों का जाल विकास की रफ्तार तो बढ़ा रहा है, लेकिन सड़क हादसों के आंकडे डरावनी तस्वीर पेष्टा कर रहे हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आंकड़ों के प्रशासन की नींद उड़ा दी है। राज्य में पिछले दो वर्षों में टराज्य महामार्गों की तुलना में राष्ट्रीय महामार्गों पर दुर्घटनाएं और मौतें लगभग दोगुणी दर्ज की गई हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अकेले जनवरी 2026 में ही राज्य और राष्ट्रीय महामार्गों पर कुल 776 लोगों की मौत हो गई।
आकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य महामार्गे पर 5,814 दुर्घटनाएं हुई, जिनमें 3,169 लोगों की मौत हो माई। वहीं वर्ष 2025 में 5,548 दुर्घटनाओं में 3,080 लोगों की जान गई। जनवरी 2006 में ही राज्य महामागों पर 525 दुर्घटनाएं हुई, जिनमें 284 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके विपरीत राष्ट्रीय महामागों पर स्थिति और में गंभीर बताई गई है। वर्ष 2024 में 11,285 दुर्घटनाओं में 5,612 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2025 में 11,241 हादसे में 5,794 लोगों की जान चली गई। जनवरी 2026 में ही 978 दुर्घटनाओं में 492 लोगों की मौत हो चुकी है।
समृद्धि महामार्ग पर भी चिंताजनक आंकड़े : नागपुर सुबई समृद्धि महामार्ग पर भी दुर्घटनाओं का खतरा कम नहीं हुआ है। 11 दिसंबर 2022 से 31 जनवरी 2026 तक इस मार्ग पर 491 हादसे हुए, जिनमें 444 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर को आरटीआई के जरिए प्राप्त हुई। विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलान, शराब पीकर ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण है। इसके अलाव कई जगह खराब सहके, अपयश रोशनी, खतरनाक मोड़ और लंबे सफर के दौरान ब्रड्यरों की थकान भी गंभीर हादसे की वजह बन रही है। विशेषों का कहना है कि अगर समय रहते चालक सतर्क नहीं हुए और नियनों का पालन नहीं किया गया, तो सड़के लगातार लोगों की जान लेती रहेंगी। इसलिए हर वाहन चालक को सावधानी और जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाना बेहद जरूरी है।
हादसों के लैंगिक आंकड़ों ने एक नया पहलू सामने रखा है। 1 जनवरी 2021 से 31 जनवरी 2006 के बीच महाराष्ट्र में कुल 1,73,771 सड़क हादसे दर्ज किए गए। मृतक महिलाएं 8,847 मूलक पुरुषः 67,637 आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुला में सत गुन से भी अधिक है। इसका मुख्य कारण पुरुषों द्वारा अधिक लंबी दूरी की ब्रइविंग और तेज रफ्तार को माना जा रहा है।
पुरुषों की मौत महिलाओं से 7 गुना ज्यादा
विशेषज्ञों का कहन है कि, जब तक चालक नियमों के प्रति अंमेर नहीं होंगे, तब तक सड़कों को सुरक्षित बनाना असंभव है। लंबी यात्रा के दौरान इइवरों की बकान और यत्तायात नियमों की अनदेखी राज्य में हर दिन वर्जनों घरों के चिराम बुझ्न रही है। उक्त आकडे सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर को आरटीआई के लहत प्राप्त जानकारी के अनुसार है।








