– सीआईडी जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
नागपुर :- राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद रा’य में घोषित शासकीय शोक के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसे महाराष्ट्र रा’य अल्पसंख्यांक आयोग ने अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक बताया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित अवधि में एक ही दिन में कई प्रमाणपत्र जारी किए गए तथा अवकाश दिवस को छोडक़र मात्र चार दिनों में लगभग 75 शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया.
महाराष्ट्र रा’य अल्पसंख्यांक आयोग के अध्यक्ष (मंत्री दर्जा) प्यारे खान ने कहा कि शासकीय शोक के दौरान इस प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रिया चलाना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि पारदर्शिता और नियमों के पालन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. उन्होंने कहा कि जिन प्रस्तावों को पहले लंबित या स्थगित रखा गया था, उन्हें अचानक सक्रिय कर बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र जारी करना प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन प्रतीत होता है.
आयोग के संज्ञान में यह भी आया है कि अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से संबंधित संस्थाओं को प्रवेश प्रक्रिया में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों सहित विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय लाभ प्राप्त होते हैं. ऐसे में कम समय में बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष और विस्तृत जांच आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या आर्थिक लेनदेन की संभावना की जांच हो सके.
अल्पसंख्यांक आयोग के अध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण की जांच अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) से कराए जाने की मांग की है. साथ ही, यदि जांच में कोई अधिकारी या संबंधित व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए. इस संबंध में आयोग द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर उ’चस्तरीय जांच और आवश्यक कार्रवाई की औपचारिक मांग की जाएगी.
महाराष्ट्र रा’य अल्पसंख्यांक आयोग ने स्पष्ट किया है कि शासन-प्रशासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और नियमसम्मत होनी चाहिए. यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रह सके.




