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बाघ जबड़े में दबाकर ले गया… फिर छोड़ दिया

नागपुर/चंद्रपुर :- बाघ के सामने आने के बाद बच निकलना लगभग असंभव माना जाता है, लेकिन चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही तहसील के सावंगी (बडो) गांव में एक 30 वर्षीय चरवाहे ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए मौत के मुंह से खुद को बाहर निकाल लिया। बाघ ने उस पर हमला कर कुछ दूर तक घसीटा, लेकिन अचानक उसे छोड़ दिया। इसी एक पल का फायदा उठाकर युवक ने अपनी जान बचा ली।

यह रोमांचक घटना रविवार दोपहर की है। घायल युवक की पहचान कांचन खोब्रागड़े (30) के रूप में हुई है। वह गांव के पास नहर किनारे अपने मवेशी चरा रहा था। इसी दौरान अचानक झाड़ियों से एक बाघ निकल आया। बाघ को देखते ही मवेशियों में भगदड़ मच गई। कांचन कुछ समझ पाता, उससे पहले ही बाघ ने उस पर झपट्टा मार दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघ ने कांचन को दबोचकर कुछ दूरी तक घसीटा। लेकिन कुछ ही क्षण बाद वह रुक गया और युवक को छोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि संभवतः बाघ ने पहले उसे किसी जानवर के रूप में समझकर हमला किया होगा। जब उसे एहसास हुआ कि वह इंसान है, तो उसने हमला रोक दिया और कुछ दूरी पर खड़ा होकर उसे देखने लगा। इस बेहद नाजुक स्थिति में कांचन ने घबराने या शोर मचाने के बजाय धैर्य बनाए रखा। जैसे ही उसे मौका मिला, वह धीरे-धीरे वहां से निकला और दौड़ते हुए सीधे गांव पहुंच गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।

मानव-बाघ संघर्ष बना बड़ी चुनौती

इस घटना ने एक बार फिर चंद्रपुर जिले में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर कर दिया है। ताडोबा के आसपास के वन क्षेत्रों और गांवों में बाघों की बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण लगातार भय के साये में जी रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले छह महीनों में चंद्रपुर जिले में बाघों के हमलों में 25 से अधिक ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में अब बड़ी संख्या में बाघ संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर भी विचरण कर रहे हैं, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

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