– सरकारी कर्मचारियों की मानसिक थकान
नागपुर :- राज्य भर में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के कारण सरकारी तंत्र पूरी तरह से चरमरा गया है. मनपा, नगरपालिका, राजस्व विभाग और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर एक ही समय में कई जिम्मेदारियों का बोझ रहता है.
विभागीय स्तर पर इस बात पर गंभीर चर्चा चल रही है कि व्यवस्था चरमरा गई है और इसका सीधा असर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है. नागपुर समेत विदर्भ के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के बीच कार्य तनाव या मानसिक तनाव का मुद्दा आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है.
प्रशासन समय पर एसआईआर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रतिदिन समीक्षा बैठकें कर रहा है. सहायक आयुक्त, तहसीलदार और वरिष्ठ अधिकारी लगातार प्रगति रिपोर्ट मांग रहे हैं.
इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है. हालांकि, कई कर्मचारी दुविधा में फंसे होने की भावना व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस जिम्मेदारी को निभाते हुए अपना बुनियादी कार्यालयी कार्य भी जारी रखना है.
मनपा कर्मचारियों को नागरिक सेवाएं, कर संग्रह, स्वच्छता, जलापूर्ति और जमीनी स्तर पर शिकायतों का निपटान करना होता है. वहीं, शिक्षकों को शिक्षण, परीक्षा, छात्र अभिलेख और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ एसआईआर का कार्यभार भी सौंपा गया है.
सरकार द्वारा जनगणना की तैयारी के आदेश जारी करने से स्थिति और भी जटिल हो गई है. कई विभागों को 14 जून तक जनगणना का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में भ्रम और तनाव पैदा हो गया है. कर्मचारी संगठनों के अनुसार, अपर्याप्त कर्मियों के बावजूद काम पहले से ही चल रहा है, और एक ही व्यक्ति दो नहीं बल्कि तीन जिम्मेदारियां निभा रहा है. परिणामस्वरूप, कई नियमित कार्य विलंबित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर पड़ रहा है.
कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी शिकायतें व्यक्त कीं. एक कर्मचारी ने कहा, ‘हमें सुबह से ही जनगणना के काम के लिए इधर-उधर घूमना पड़ रहा है. साथ ही, एसआईआर से संबंधित रिपोर्टों के लिए फोन, मैसेज और मांगें आ रही हैं. दफ्तर का काम रुका हुआ है. लगातार दबाव के कारण मानसिक तनाव बहुत बढ़ गया है.
एक शिक्षक ने कहा, स्कूल में पढ़ाना, छात्रों का पंजीकरण, परीक्षाए और अबइ एसआईआर और जनगणना जैसी जिम्मेदारियां निजी जीवन को भी प्रभावित कर रही हैं. निरंतर भागदौड़ से मानसिक थकान बढ़ रही है. कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि वे चिड़चिड़े, बेचैन और अवसादग्रस्त महसूस कर रहे हैं.
यह बात सामने आई है कि वे इस मुद्दे को खुलकर उठाने से भी डरते हैं. ऐसी चर्चा है कि वे अपने वरिष्ठों की कार्रवाई या नौकरी पर पडऩे वाले प्रभाव के डर से अपनी नाराजगी दबा रहे हैं.



