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‘आदिशक्ति से नारीशक्ति’ अभियान के तहत कोराडी संस्थान परिसर महिला सशक्तिकरण का आदर्श केंद्र बनेगा – पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे

▪ राज्य का पहला अभिनव उपक्रम

▪ सूती कपड़ों पर कलमकारी (ब्लॉक प्रिंटिंग) व सिलाई प्रशिक्षण का शुभारंभ

▪ हर वर्ष 1,000 महिलाओं को स्व-रोज़गार का अवसर

▪ 6 करोड़ रुपये निधि उपलब्ध

नागपुर :- जिस श्रद्धा और भक्ति भाव से हम देवी की आराधना करते हैं, वही श्रद्धा और निष्ठा यदि हम अपने कार्यों में रखें तो सफलता पाने में देर नहीं लगती। कोराडी स्थित महालक्ष्मी देवी संस्थान परिसर में घटस्थापना के अवसर पर शुरू किए गए ‘आदिशक्ति से नारीशक्ति’ अभियान का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है। इस प्रकल्प से जुड़ी महिलाएं अपनी नवोन्मेषी सोच और कौशल के बल पर इस केंद्र को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी, ऐसा विश्वास राज्य के राजस्व मंत्री एवं पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने व्यक्त किया।

वे कोराडी मंदिर परिसर में जिला नियोजन समिति और महिला आर्थिक महामंडल के संयुक्त तत्वावधान में स्थापित कलमकारी गारमेंट क्लस्टर के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर माविम के विभागीय सलाहकार राजू इंगळे, वरिष्ठ जिला समन्वय अधिकारी नरेश उगेमुगे, गुल्हाणे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

इस प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से लगभग 1,000 महिलाओं को प्रतिवर्ष लगातार प्रशिक्षण दिया जाएगा। पालकमंत्री बावनकुळे ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन महिलाओं को यहां अपने कौशल के बल पर अवसर मिलेगा, उन्हें उचित मेहनताना अवश्य मिले, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण हो सके। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदर्शिता के चलते इस प्रकल्प को 6 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई है, जिसका सदुपयोग सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

इस अवसर पर उनके हाथों सूती कपड़ों पर कलमकारी (ब्लॉक प्रिंटिंग) यूनिट और सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के अंतर्गत निर्मित ड्रेस मटेरियल, रेडीमेड ड्रेसेस और अन्य उत्पादों की बिक्री अमेज़न के जरिए तथा मंदिर परिसर में बनाए जाने वाले बिक्री केंद्र के माध्यम से की जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर कोराडी परिसर के प्रत्येक गांव की महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए आगे लाने की योजना है। भविष्य में दो-दो गांवों के क्लस्टर बनाकर महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, मंदिर के निर्माल्य से गुणवत्तापूर्ण अगरबत्तियां बनाने पर भी जोर रहेगा।

यह अभियान शाश्वत खेती, शाश्वत रोजगार और निरंतर विकास की त्रिसूत्री पर आगे बढ़ेगा।


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