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शासन हमारे मरने का इंतजार कर रही है?

◼️वनकर्मी वेतन में देरी के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 

◼️वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद विरोध प्रदर्शन रद्द 

सचिन चौरसिया, रामटेक :- तालुका के देवलापार क्षेत्रीय वनक्षेत्र में वन्यजीवों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम कर रहे ९४ मौसमी वनकर्मियों को पिछले छह महीनों से वेतन न मिलने के कारण २२ जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। प्राथमिक प्रतिक्रिया दल और त्वरित प्रतिक्रिया दल के सदस्य इन कर्मचारियों ने ११ जून को वनरेंज अधिकारियों को अपने बकाया वेतन के संबंध में ज्ञापन सौंपा। हालांकि, प्रशासन द्वारा केवल एक महीने का वेतन देने में देरी से नाराज कर्मचारियों ने यह विरोध प्रदर्शन किया था। अंततः, सहायक वनसंरक्षक गोविंदा लुचे, वनरेंज अधिकारी शेषराव तुले और सागर बन्सोड के ठोस आश्वासनों के बाद, वनकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। ये कर्मचारी अवैध कटाई को रोकने, जंगल की आग बुझाने और तेंदुए और बाघ जैसे जंगली जानवरों के हमलों से नागरिकों की रक्षा करने जैसे जानलेवा कार्य करते हैं। जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर शासन २५ लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करती है। तो फिर, ऐसी घटनाओं को रोकने वाले वनकर्मियों का छह महीने का वेतन रोके रखना शर्मनाक नहीं है? क्या शासन हमारे मरने का इंतजार कर रही है? प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में पूछा। ऐसे समय में जब बुवाई के मौसम में खेतों में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता है, इस आंदोलन ने वनव्यवस्थापण प्रणाली खतम होने का डर पैदा कर दिया है। अब मांग की जा रही है कि प्रशासन इस समस्या का तत्काल स्थायी समाधान निकाले।

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