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जिंदगी की तलाश मे पुनर्वसन लटका, कब मिलेगी राहतबराच मोकासा गांव का पुनर्वास अटका; KPCL की ब्लास्टिंग से ग्रामीणों का जीवन संकट मे

<p><strong>सुशांत घाटे&comma; चंद्रपूर &colon;-<&sol;strong>चंद्रपुर जिले के भद्रावती तालुका अंतर्गत आने वाले बराच मोकासा गांव का पुनर्वास का प्रश्न वर्षांे बाद भी प्रलंबित बना हुआ है। ग्रामस्थों के अनुसार&comma; कर्नाटक सरकार के अंतर्गत कार्यरत KPCL &lpar;कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड&rpar; कंपनी की कथित हठधर्मिता और अनियंत्रित उत्खनन के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।<&sol;p>&NewLine;<p>ग्रामवासियों का आरोप है कि कंपनी ने पुनर्वास प्रक्रिया पूर्ण किए बिना गांव के चारों ओर बड़े पैमाने पर कोयले का उत्खनन शुरू कर दिया है। इस उत्खनन और लगातार हो रही ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के घरों में दरारें पड़ रही हैं&comma; कई घर आंशिक तौर पर ध्वस्त हुए हैं और बच्चों तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।<&sol;p>&NewLine;<p>ग्रामीणों ने बताया कि रोजाना होने वाली ब्लास्टिंग भूकंप जैसे झटके देती है&comma; जिससे बुजुर्गों और महिलाओं में भय का वातावरण बना रहता है। खेतों&comma; पशुओं और रोजमर्रा की जीवनचर्या पर भी इसका व्यापक परिणाम दिखाई दे रहा है। कई बार स्थानीय नागरिकों ने समाचार माध्यमों और प्रशासन के समक्ष समस्या रखी&comma; लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।<img class&equals;"alignnone wp-image-23349 size-full" src&equals;"https&colon;&sol;&sol;insidernewstoday&period;in&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;12&sol;IMG-20251208-WA0003&lowbar;copy&lowbar;800x543&period;webp" alt&equals;"" width&equals;"799" height&equals;"543" &sol;><&sol;p>&NewLine;<p>गांव के निवासी विशाल दुधे ने KPCL प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि लगभग 84&period;41 हेक्टेयर क्षेत्र&comma; जिसे वन विभाग ने झुडपी जंगल के रूप में चिन्हित किया था&comma; उसका उत्खनन कथित रूप से बिना अनुमति के किया गया। दुधे के अनुसार&comma; वन विभाग ने इसका विरोध भी व्यक्त किया था&comma; लेकिन राज्य सरकार की दोहरी नीति के कारण KPCL के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>दुधे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि –<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>&OpenCurlyDoubleQuote;वन विभाग की भूमि से यदि एक ट्रैक्टर रेत अवैध रूप से उठ जाए&comma; तो विभाग दुसरे ही दिन बड़ी कार्रवाई करता है और अखबारों में सुर्खियां बनती हैं… लेकिन यहां राष्ट्रीय संपत्ति का बड़ा नुकसान होते हुए भी प्रशासन चुपचाप तमाशा देख रहा है।”<&sol;p>&NewLine;<p>ग्रामस्थों का कहना है कि KPCL कंपनी पर किसी तरह की नियंत्रण व्यवस्था नहीं है&comma; जिससे प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट चल रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन के अधिकारी &OpenCurlyQuote;मूकदर्शक’ बने हुए हैं और कंपनी के अवैध उत्खनन तथा ब्लास्टिंग गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह असफल रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>ग्रामीणों ने कई दौर की बैठकें&comma; निवेदने और पत्रव्यवहार किए&comma; लेकिन समाधान के अभाव में अब वे एकबार फिर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>विशाल दुधे ने चेतावनी देते हुए कहा है कि—<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>&OpenCurlyDoubleQuote;यदि सरकार ने जल्द ही बराच मोकासा गांव के पुनर्वास का प्रश्न हल नहीं किया&comma; तो हम गांववासियों के साथ बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। आने वाले हिवाळी अधिवेशन में हजारों ग्रामीणों के साथ मोर्चा लेकर नागपुर कूच किया जाएगा।”<&sol;p>&NewLine;<p>बराच मोकासा के पुनर्वास का मुद्दा लंबे समय से अटका पड़ा है और ग्रामीण लगातार प्रशासनिक उपेक्षा झेल रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार गांववासियों की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है और इस संवेदनशील मुद्दे को तत्काल हल करने के लिए क्या कदम उठाती है।<&sol;p>&NewLine;