– एमजेपी की थोक जलापूर्ति योजना मंजूर, एक लाख लोगों को राहत की उम्मीद
नागपुर :- नागपुर के बाहरी क्षेत्रों में स्थित 12 गांवों के करीब एक लाख निवासियों को जलापूर्ति के खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजेपी) के बोर्ड ने इन गांवों के लिए थोक जलापूर्ति मॉडल को मंजूरी दे दी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पानी की आपूर्ति की लागत को नियंत्रित करना और नागरिकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम करना है।
नई व्यवस्था के तहत एमजेपी संबंधित नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों की ऊंची जल भंडारण टंकियों तक पानी पहुंचाएगा। इसके बाद स्थानीय निकाय अपने पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से घरों तक पानी वितरित करेंगे। इससे पहले एमजेपी सीधे खुदरा स्तर पर जलापूर्ति करता था, जिसके कारण नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र के बाहर रहने वाले नागरिकों पर अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक बोझ पड़ता था।
स्स्मार्ट मीटर से होगी निगरानी
नई व्यवस्था में तकनीक आधारित निगरानी को भी अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक जल भंडारण टंकी पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इनसे आपूर्ति किए जाने वाले पानी की मात्रा का सटीक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। इसके अलावा, जलापूर्ति व्यवस्था को स्वचालित बनाने की योजना भी है।
बिजली खर्च कम करने और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने पर भी विचार किया जाएगा।
स्थानीय निकायों को करना होगा समझौता:
थोक जलापूर्ति व्यवस्था का लाभ लेने के लिए संबंधित नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों को एमजेपी के साथ औपचारिक समझौता करना होगा। साथ ही, उन्हें पानी के मौजूदा और बकाया बिलों का नियमित भुगतान करना अनिवार्य होगा।…
बावनकुले ने फैसले का किया स्वागत
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र और आसपास के गांवों में पानी की दरों में अंतर को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। बाहरी क्षेत्रों के नागरिकों को भी समान और किफायती दरों पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता थी।
बावनकुले ने कहा कि एमजेपी बोर्ड की मंजूरी से इन 12 गांवों के निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। नई व्यवस्था से जलापूर्ति की लागत नियंत्रित होने और नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।








