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गडचिरोली में भूमाफिया का 2000 करोड़ का भूखंड घोटाला

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<p><strong>&&num;8211&semi; अधिकारी और नगररचना विभाग के भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>गडचिरोली जिले में सरकारी और आदिवासी आबंटित जमीन की अवैध बिक्री का बड़ा खुलासा हुआ है। भूमाफिया&comma; नगररचना विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के बीच मिलीभगत से यह घोटाला सालों से चल रहा था। पिछले कुछ वर्षों में भूखंडों की नकली &OpenCurlyQuote;लेआउट’ बनाकर करोड़ों की अवैध बिक्री की गई है&comma; जो अब भी जारी है।<&sol;p>&NewLine;<p>नगररचना विभाग की सहायक संचालक अर्चना पुट्टेवार की गिरफ्तारी के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ था&comma; लेकिन इसमें शामिल वरिष्ठ अधिकारियों के कारण जांच ठप्प पड़ी थी। इस घोटाले की ताजा शिकायत सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को गडचिरोली दौरे पर पहुंचे महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के समक्ष की&comma; जिसके बाद मंत्री ने जिल्हाधिकारी की अध्यक्षता में एसआइटी गठित कर कठोर जांच का आदेश दिया है। इस घोटाले में फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त की गई और इसमें शामिल अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। करीब 2000 करोड़ रुपये के इस भूखंड घोटाले की जांच ने जिले की राजनीति और प्रशासन में भूचाल ला दिया है। मंत्री बावनकुळे ने भी इस घोटाले को गंभीर बताते हुए कहा है कि जांच के दौरान बड़े-बड़े नाम सामने आ सकते हैं। अब एसआइटी की रिपोर्ट पर पूरे मामले का पर्दाफाश होगा।<&sol;p>&NewLine;<p>गडचिरोली जिले में भूमाफिया ने खेला ऐसा बड़ा खेल कि करोड़ों की सरकारी और आदिवासी जमीनों की अवैध बिक्री से 2000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में नगररचना विभाग के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के कुछ अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं&comma; जिनकी मिलीभगत से यह अवैध कारोबार सालों से चल रहा था। फर्जी दस्तावेजों के सहारे भूखंडों की नकली &OpenCurlyQuote;लेआउट’ तैयार कर&comma; इन जमीनों को कोट्यधीक रुपए में बेचने का यह गिरोह लगातार सक्रिय था। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घोटाले को दबाने की कोशिश भी की। मामले की गंभीरता को समझते हुए महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने जिल्हाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम &lpar;एसआईटी&rpar; गठित कर कड़े और निष्पक्ष जांच का आदेश दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि घोटाले के बड़े-बड़े नाम भी बाहर आ सकते हैं। यह घटना न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है बल्कि ग्रामीण और आदिवासी जमीनों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा खतरा भी है। अब सबकी निगाहें इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं&comma; जो जल्द ही पूरे मामले का पर्दाफाश करेगी।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>फाईल फोटो<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;

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