– सरकारी गारंटी मंजूर, भूमि अधिग्रहण को मिलेगी रफ्तार
नागपुर :- महाराष्ट्र सरकार ने प्रस्तावित नागपुर-गोंदिया एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के भूमि अधिग्रहण के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 3,162.18 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी को मंजूरी दे दी है। यह गारंटी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) द्वारा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हुडको) से लिए जाने वाले ऋण के लिए दी गई है।
राज्य के वित्त विभाग ने 21 जुलाई को इस संबंध में शासनादेश जारी किया। स्वीकृत गारंटी में 2,006.03 करोड़ रूपये मूल ऋण तथा 1,156.16 करोड़ रुपये संभावित ब्याज शामिल है। इस प्रस्ताव को 22 अप्रैल 2026 को हुई मंत्रिमंडल की आधारभूत संरचना समिति (कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी) की बैठक में मंजूरी दी गई थी।
162.37 किमी लंबा होगा एक्सप्रेसवे:
करीब 21,670 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे 162.377 किलोमीटर लंबा होगा। यह नागपुर जिले के गावसी मानापुर से शुरू होकर गोंदिया जिले के सावरी तक जाएगा। छह लेन वाला यह एक्सप्रेसवे नागपुर, भंडारा और गोंदिया जिलों के बीच तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा।
1,634 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण:
परियोजना के लिए लगभग 1,634.27 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर विभिन्न स्थानों पर आवागमन की सुविधा के लिए नौ इंटरचेंज विकसित किए जाएंगे।
15 वर्ष की अवधि का होगा ऋण :
सरकारी गारंटी 12 माह तक प्रभावी रहेगी और इसकी अधिकतम सीमा 3,162.18 करोड़ रुपये होगी। हुडको से लिया जाने वाला ऋण 15 वर्ष की अवधि के लिए होगा। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि ऋण की अदायगी की पूरी जिम्मेदारी एमएसआरडीसी की होगी। किसी भी स्थिति में इस ऋण का वित्तीय दायित्व राज्य सरकार पर नहीं आएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गारंटी में विलंब से भुगतान होने पर लगने वाला दंडात्मक ब्याज या अन्य शुल्क शामिल नहीं होंगे। यदि ऋण चुकाने में चूक होती है तो हुडको को 90 दिनों के भीतर राज्य सरकार को इसकी सूचना देनी होगी।
विशेष एस्क्रो खाता होगा संचालित
ऋण राशि, परियोजना से होने वाली आय और पुनर्भुगतान के प्रबंधन के लिए एमएसआरडीसी के नाम से एक स्वतंत्र एस्क्रो खाता खोला जाएगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि ऋण की राशि का उपयोग केवल इसी परियोजना के लिए किया जाएगा। यदि एमएसआरडीसी ऋण चुकाने में विफल रहती है, तो हुडको को पहले निगम की गिरवी रखी गई चल एवं अचल संपत्तियों की बिक्री या नीलामी के माध्यम से वसूली की कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद ही सरकारी गारंटी लागू की जा सकेगी।
साथ ही, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना हुडको स्वीकृत सीमा से अधिक ऋण नहीं दे सकेगा और एमएसआरडीसी भी इसी उद्देश्य के लिए किसी अन्य वित्तीय संस्था से ऋण नहीं ले सकेगी।





