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32 लाख जुर्माना माफ करने की तैयारी में मिनी मंत्रालय: जिला परिषद की ठेकेदारों पर ये ‘उदारता’ क्यों?

– डिजिटल स्कूल की राह में ‘भ्रष्टाचार’ का पैनल  

नागपुर :- जिला परिषद को मिनी मंत्रालय का दर्जा प्राप्त है और ग्रामीण विकास का काम इसी विभाग द्वारा किया जाता है. ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जिला परिषद के स्कूलों के जरिए शिक्षा दी जाती है. हालांकि, वहाँ भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है. फर्जी शालार्थ पहचान पत्र घोटाले में विभाग की पहले ही किरकिरी हो चुकी है. अब फिर से ठेकेदारों का जुर्माना माफ करने की मांग तेज हो गई है. ऐसे में, जिला परिषद ठेकेदारों के प्रति इतनी नरम क्यों है? यह सवाल इस मौके पर उठ रहा है.

जिला परिषद के स्कूलों को स्मार्ट और डिजिटल बनाने के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग के माध्यम से 298 स्कूलों में इंटरैक्टिव पैनल लगाने का निर्णय लिया गया था. ठेकेदार ने समय पर पैनल नहीं लगाए. इस वजह से उस पर लगभग 32 लाख का जुर्माना लगाया गया था. लेकिन अब जिला परिषद उदार हो रही है और जुर्माना माफ करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों से पता चला है कि ऐसा ही एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया है. चर्चा है कि चूंकि ठेकेदार किसी के पक्ष में है, इसलिए जुर्माना माफ कर दिया जाएगा. इसलिए, अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनि इस पर क्या निर्णय लेते हैं.

जिला परिषद के 298 स्कूलों में इंटरेक्टिव पैनल लगाए जा चुके हैं. संबंधित स्कूलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है. दूसरी ओर, 31 मार्च तक यह निधि खर्च नहीं होने से यह अव्ययित की श्रेणी में आ गई, इसलिए संबंधित ठेकेदार को 3 करोड़ 7 लाख रुपये का भुगतान रुक गया. शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सीएएफओ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा. उसके बाद प्रशासन ने सरकार से मार्गदर्शन मांगा. वित्त विभाग ने 28 अक्टूबर 2०25 को एक सरकारी निर्णय जारी कर इस निधि को खर्च करने की समय सीमा 28 फरवरी 2०26 तक बढ़ा दी. इससे ठेकेदार को शेष राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया. हालांकि, तकनीकी संस्थान नागपुर को यह जिम्मेदारी दी गई है कि तकनीकी ऑडिट के बाद यह राशि ठेकेदारों के कंधों पर आ जाएगी. इसके लिए पूर्णता राशि संबंधित विभाग के पास जमा होने के बाद इन सभी स्कूलों का ऑडिट कराया जाएगा. उसके बाद भुगतान किया जाएगा.

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