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7 साल इंतजार, फिर भी नहीं मिला सोलर पंप!

<p><strong>&&num;8211&semi; महावितरण को फटकार&comma; 60 दिन में सोलर पंप लगाने का आदेश<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>नागपुर &colon;-<&sol;strong> à¤®à¤¹à¤¾à¤µà¤¿à¤¤à¤°à¤£ &lpar;एमएसईडीसीएल&rpar; की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक किसान ने 3 एचपी सोलर कृषि पंप के लिए 16&comma;560 रुपये जमा किए&comma; लेकिन सात साल से अधिक समय बीतने के बावजूद उसे पंप और बिजली कनेक्शन नहीं मिला। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महावितरण को 60 दिनों के भीतर किसान के खेत में सोलर पंप लगाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये&comma; कुल 35 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।<&sol;p>&NewLine;<p>आयोग ने 22 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में कहा कि किसान ने निर्धारित राशि जमा कर दी थी&comma; लेकिन इसके बावजूद उसे वर्षों तक बिजली वितरण कंपनी के चक्कर लगाने पड़े। यह सेवा में कमी का मामला है।<&sol;p>&NewLine;<p>हालांकि&comma; आयोग ने फसल सूखने से हुए कथित नुकसान के लिए किसान द्वारा मांगे गए 24&period;93 लाख रुपये के मुआवजे को खारिज कर दिया। आयोग का कहना था कि प्रति एकड़ 20 क्विंटल कपास उत्पादन का अनुमान केवल अटकलों पर आधारित था। इस बात का कोई स्वतंत्र प्रमाण भी नहीं था कि 2019 और 2020 में फसल खराब होने का एकमात्र कारण बिजली कनेक्शन नहीं मिलना था।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>2019 में जमा किए थे 16&comma;560 रुपये<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील के निवासी 69 वर्षीय किसान ने मौजा डुंडाखैरी स्थित अपने 1&period;83 हेक्टेयर खेत में कुएं के लिए 3 एचपी सोलर कृषि पंप लगाने का आवेदन किया था। महावितरण की ओर से डिमांड नोट जारी किए जाने के बाद किसान ने 10 जुलाई 2019 को 16&comma;560 रुपये जमा किए थे।<&sol;p>&NewLine;<p>इसके बावजूद बार-बार संपर्क करने पर भी कंपनी ने पंप नहीं लगाया। किसान ने जनवरी 2021 में कानूनी नोटिस भेजा और फरवरी 2021 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>कंपनी के दावे में मिली विसंगतियां<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>सुनवाई के दौरान महावितरण ने दावा किया कि किसान ने दिसंबर 2019 और सितंबर 2020 में दो पत्र देकर सोलर पंप लेने से इनकार कर दिया था। इसके बजाय उसने सामान्य थ्री-फेज बिजली कनेक्शन मांगा था।<&sol;p>&NewLine;<p>किसान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसे अंग्रेजी नहीं आती और कंपनी के कर्मचारियों ने उसके हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर फर्जी पत्र तैयार किए। उसने शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया।<&sol;p>&NewLine;<p>आयोग ने महावितरण के रिकॉर्ड में विरोधाभास पाया। कंपनी का दावा था कि किसान ने दिसंबर 2019 में सोलर योजना से अपना नाम वापस ले लिया था&comma; लेकिन मई 2020 में उसने किसान द्वारा टाटा पावर सोलर लिमिटेड का विक्रेता के रूप में ऑनलाइन चयन स्वीकार किया। इसके बाद सितंबर 2020 में संयुक्त रूप से खेत का निरीक्षण भी किया गया।<&sol;p>&NewLine;<p>आयोग ने कहा कि यदि किसान ने वास्तव में योजना से नाम वापस ले लिया था&comma; तो कंपनी को उसकी जमा राशि लौटाकर आवेदन बंद कर देना चाहिए था। इसके विपरीत कंपनी की बाद की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि आवेदन को सक्रिय रखा गया था।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>30 दिन में मुआवजा देने का आदेश<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम&comma; 2019 के तहत सेवा में कमी के लिए महावितरण को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग ने निर्देश दिया कि किसान से पहले जमा कराए गए 16&comma;560 रुपये के अलावा कोई अतिरिक्त राशि लिए बिना 60 दिनों के भीतर सोलर पंप लगाया जाए।<&sol;p>&NewLine;<p>इसके अलावा कंपनी को मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये&comma; कुल 35 हजार रुपये 30 दिनों के भीतर देने होंगे। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।<&sol;p>&NewLine;