– 3.25 करोड़ खर्च, फिर भी बेकार पड़ा मछली मार्केट, व्यापारी परेशान
– अदालत के आदेश भी बेअसर, पार्किंग में लग रहा मछली बाजार
नागपुर :- बजरिया के – मछली बाजार को शिफ्ट करने में प्रशासन नाकाम रहा है. साथ ही यहां की व्यवस्था भी नहीं सुधारी जा रही है. आज भी रोड के दोनों साइड में मछली की दुकानें सजाई जा रही हैं जिसके चलते वाहनों का गुजरना मुश्किल हो रहा है. मछली व्यापारी भी असुविधाओं के चलते त्रस्त हो गए हैं. दरअसल, करीब 80-90 वर्ष पुराने इस मार्केट को शिफ्ट करने के लिए मंगलवारी जोन सदर में मार्केट तैयार किया गया लेकिन जिम्मेदार कर्णधारों ने थोक बाजार के लिए मंजूरित निधि से चिल्लर बाजार की तरह छोटे-छोटे ओटे तैयार कर डाले. ओटे इतने छोटे हैं कि उसमें कोई अपनी दुकान सजा ही नहीं सकता. यह मामला अदालत में भी गया और जानकारी के अनुसार अदालत ने ओटों को तोड़कर जगह समतल कर व्यापारियों को शिफ्ट करने का निर्देश दिया. मनपा प्रशासन ने कुछ सुधार कार्य भी किये लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं था जिसके चलते व्यापारी वहां जाने से कतरा रहे हैं. मनपा प्रशासन व्यापारियों को शिफ्ट करने के प्रति उदासीन बना हुआ है. करोड़ों खर्च कर बनाया गया मार्केट कोई काम का नहीं रह गया है. 3.25 करोड़ रुपये हुए खर्च : बजरिया के मछली व्यवसायी गौर ने बताया कि प्रवीण दटके जब मनपा के मेयर और दयाशंकर तिवारी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन थे तब सरकार से मंगलवारी जोन में थोक मछली मार्केट बनाने के लिए 3.25 करोड़ रुपये की निधि मंजूर हुई थी. निधि तो थोक बाजार के लिए मिली थी लेकिन यहां के कर्णधारों ने 4 बाय 4 फुट के छोटे-छोटे ओटे बनाकर इसे चिल्लर बाजार के लायक भी नहीं रखा. 108 ओटे बनाए गये लेकिन वे इतने छोटे कि दुकान लगाई ही नहीं जा सकती.
कोई व्यापारी शिफ्ट नहीं हो पा रहा
गौर ने बताया कि मार्केट में एक बड़ा हॉल भी बनाया गया है लेकिन वहां कोई भी विक्रेता अंदर नहीं बैठता. हर मंगलवार और शुक्रवार को यहां मछली बाजार लगता है. यह बाजार मार्केट में जो पार्किंग के लिए जगह छोड़ी गई वहां भरता है. ओटे तोडकर जगह समतल कर व्यापारियों को देने का निर्देश अदालत ने दिया है लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है. यही वजह है कि बजरिया से कोई व्यापारी शिफ्ट नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि थोक बाजार की सुविधाएं उपलब्ध हों तो सभी व्यापारी वहां शिफ्ट हो सकते हैं. इससे बजरिया का रोड भी क्लीयर होगा और नागरिकों के साथ व्यापारियों की परेशानी भी खत्म होगी.




