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हिंदू मंदिर मदद को आगे, तो मस्जिद-दर्गाह क्यों पीछे?

– बाढ़ राहत पर बीजेपी का सवाल, सरकार की मदद पर उठे सियासी सुर

मुंबई :- महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ से तबाही मचने के बाद अब मौसम विभाग ने कुछ राहत के संकेत दिए हैं। हालांकि, पालघर, ठाणे, मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी, नासिक, पुणे और सातारा जिलों में येलो अलर्ट जारी है, जहां अगले दो दिनों तक तेज़ बारिश हो सकती है। इस बीच, बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों की मदद को लेकर सियासत भी गर्मा गई है। भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया है कि, “हिंदू मंदिर और संत समाज सबसे पहले बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन दर्गाहें और मस्जिदें इस राहत कार्य में कहां हैं?” पार्टी के नेताओं ने कहा कि जब संकटकाल आता है, तो धार्मिक स्थलों की भूमिका समाज के लिए सबसे अहम होती है, और इस समय एकपक्षीय सेवा दिख रही है। शिवसेना (ठाकरे गुट) ने सरकार की राहत नीति पर तंज कसते हुए कहा, “अगर इस समय महाराष्ट्र में चुनाव होते, तो केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पैसों की बाढ़ आ जाती। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक केवल घोषणाएं की हैं, जमीनी स्तर पर पीड़ितों को राहत नहीं मिली है। “महाराष्ट्र पर आभासी संकट नहीं, असली ‘आभाळ’ फटा है। अब राज्य सरकार को खजाने की खिड़की खोलनी चाहिए,” यह मांग भी शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में जोरदार तरीके से रखी गई है।

आज होगी कैबिनेट बैठक, दिवाली से पहले राहत की उम्मीद

आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें अतिवृष्टि और बाढ़ग्रस्त इलाकों के लिए आर्थिक सहायता के फैसले लिए जा सकते हैं।

शेतकऱ्यांची (किसानों की) मांग है कि जो भी मदद घोषित की जाए, वह दिवाली से पहले उनके हाथों तक पहुँचे। राजनीतिक घमासान और आसमानी आफत के बीच, अब जनता की निगाहें सरकार की आज की कैबिनेट मीटिंग पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि महाराष्ट्र के करोड़ों नागरिकों को त्योहार से पहले राहत मिलेगी या नहीं।

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