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नागपुर मेडिकल में बढ़े ‘सिजेरियन’ प्रसव- दो साल में 55 फीसदी से ज़्यादा ऑपरेशन डिलीवरी

– नॉर्मल डिलीवरी’ में गिरावट, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बढ़ी चिंता

नागपुर :- सामान्य रूप से महिलाओं को’नॉर्मल डिलीवरी’ के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास होता है, लेकिन नागपुर के शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) में पिछले दो वर्षों में ‘सिजेरियन’ प्रसव का प्रतिशत उल्लेखनीय रुप से बढ़ गया है. आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में अस्पताल में होने वाले कुल प्रसवों में से लगभग 55 प्रतिशत प्रसव सिजेरियन हो रहे हैं, जबकि ‘नॉर्मल’ प्रसव का प्रतिशत घटकर 45 प्रतिशत रह गया है. ‘नॉर्मल डिलीवरी’ का अनुपात बनाए रखना अब एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बन गई है. आरटीआई एक्टिविस्ट अभय कोलारकर की जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में मेडिकल में कुल 8,010 प्रसव हुए. इनमें से 54.26 प्रतिशत (4,347) प्रसव सिजेरियन और 45.73 प्रतिशत (3,663) सामान्य थे.

वर्ष 2024 में प्रसवों की संख्या थोड़ी घटकर 7,502 हो गई, लेकिन उनमें से 55.47 प्रतिशत (4,162) सिजेरियन और 44.54 प्रतिशत (3,342) सामान्य थे. इससे स्पष्ट होता है कि सिर्फ एक वर्ष में सिजेरियन प्रसव में 1.21 प्रतिशत की वृद्धि, जबकि ‘नॉर्मल डिलीवरी’ में 1.19 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है.

आंकड़े बता रहे प्रसव पद्धति का बदलता ट्रेंड

वहीं मेडिकल के स्त्रीरोग एवं प्रसूति विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल हुमणे ने बताया कि मेडिकल एक टर्शियरी केयर सेंटर होने के कारण, कई जटिल मामले निजी या ग्रामीण अस्पतालों से यहां ‘रेफर’ होकर आते हैं. लगभग 30 से 40 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं रेफर होकर मेडिकल में आती हैं. इन महिलाओं में से अधिकांश की गर्भावस्था में गंभीर जटिलताएं होती हैं. ऐसे मामलों में सिजेरियन डिलीवरी ही सुरक्षित विकल्प मानी जाती है.

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