नागपुर :- अखिल भारतीय रिजर्व बैंक कर्मचारी संघ (एआईआरबीईए) ने छोटे मूल्य वाले नोटों की देशभर में ‘गंभीर किल्लत’ पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि इससे आम लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और छोटे व्यापारी भी प्रभावित हो रहे हैं. एआईआरबीईए ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेजे एक पत्र में दावा किया कि 10, 20 और 50 रुपए के नोट की उपलब्धता देश के कई हिस्सों, खासकर कस्बों एवं ग्रामीण इलाकों में लगभग नगण्य है. हालांकि इन इलाकों में 100, 200 और 500 रुपये के नोट आसानी से मिल रहे हैं.
एटीएम से निकलते हैं सिर्फ बड़े नोट : एआईआरबीईए के अनुसार एटीएम से सिर्फ उच्च मूल्य के नोट ही निकलते हैं, छोटे मूल्य के नोटों की उपलब्धता का कोई इंतजाम नहीं है. एआईआरबीईए ने इस मामले में केंद्रीय बैंक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि वाणिज्यिक बैंकों और आरबीआई काउंटरों के जरिये छोटे मूल्य के नोटों का पर्याप्त प्रसार सुनिश्चित किया जाए. इसके अलावा सिक्कों के व्यापक प्रचलन के लिए ‘कॉइन मेला’ दोबारा शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है. सिक्कों के इस मेले को पंचायतों, सहकारी संस्थाओं, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर आयोजित किया जा सकता है. आरबीआई ने कई बार छोटे डिनॉमिनेशन के करेंसी नोटों को मेटल के सिक्कों से बदलने के बारे में सोचा जो कागजी करेंसी से ज्यादा टिकाऊ होते हैं लेकिन उनमें देश के कीमती मेटल रिसोर्स का इस्तेमाल होता है और वे भी उपलब्ध नहीं हैं. एक आम आदमी को बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. उसे मजबूरन अवैध वेंडरों से ज्यादा कीमत पर छोटे नोट खरीदने पड़ते हैं. दुर्भाग्य से उसे इसके लिए नुकसान उठाना पड़ता है.








