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किडनी कांड में बड़ा खुलासा: फर्जी ‘डॉ. कृष्णा’ निकला एजेंट, सोलापुर से गिरफ्तार

– कर्ज की मार और किडनी का सौदा : किसान रोशन कुड़े केस में अंतरराष्ट्रीय रैकेट की आहट

– खुद किडनी बेच चुका था आरोपी, अब जरूरतमंदों को फंसा रहा था जाल में

चंद्रपुर :- नागभीड़ तहसील के मिथूर निवासी किसान रोशन कुड़े के किडनी विक्री मामले में एसआईटी टीम ने रविवार रात सोलापुर से डॉ. कृष्णा को गिरफ्तार किया. कृष्णा वास्तव में डॉक्टर नहीं है, बल्कि उसका असली नाम रामकृष्ण मल्लेशम सुंचू (36) है. वह एक एजेंट है और सूत्रों के अनुसार उसकी भी किडनी निकाली जा चुकी है. सोमवार को ब्रह्मपुरी न्यायालय ने कृष्णा को 25 दिसंबर तक चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. कृष्णा की गिरफ्तारी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव अंग तस्करी के बड़े रैकेट के सामने आने की संभावना जताई जा रही है. रोशन कुड़े नामक किसान ने कर्ज चुकाने के लिए डॉ. कृष्णा के संपर्क से अपनी किडनी बेची थी. इसी दौरान कुड़े ने मीडिया के सामने कहा था कि 6 अन्य लोगों ने भी किडनी बेची है. मामला मानव अंग तस्करी का होने की पुष्टि होते ही पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ने अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकड़े के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया. एसआईटी टीम ने रविवार को कृष्णा को गिरफ्तार किया. इस पूरे प्रकरण में पुलिस द्वारा अत्यधिक गोपनीयता बरती जा रही है. किडनी बिक्री के लिए जरूरतमंदों को तलाशता था : कृष्णा ने बी. टेक. की पढ़ाई की है. कुछ वर्ष पहले व्यवसाय में असफल होने के कारण वह आर्थिक तंगी में आ गया था. इसी दौरान वह किडनी बिक्री गिरोह के संपर्क में आया. उसने स्वयं भी अपनी किडनी बेची थी. इसके बाद वह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को किडनी बेचने के लिए मजबूर करने लगा. पुलिस जांच में सामने आया है कि कुड़े और कृष्णा की पहचान ‘किडनी डोनर’ ग्रुप के माध्यम से हुई थी. बाद में दोनों की मुलाकात कोलकाता में हुई और तभी से दोनों संपर्क में थे.

पांचों साहूकार न्यायिक हिरासत में 25 तक

ब्रह्मपुरी के जिन 5 साहूकारों को पहले गिरफ्तार किया गया था, उनकी पुलिस हिरासत सोमवार को समाप्त हो गई. उन्हें न्यायालय में पेश किए जाने पर न्यायाधीश ने सभी पांचों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं, एक फरार साहूकार ने जमानत के लिए अदालत का रुख किया है. वीडियो कॉल के जरिए कराई गई पहचान: पुलिस ने कुड़े का मोबाइल जब्त करने के बाद व्हाट्स एप्प चैट और कॉल रिकॉर्ड खंगाले. सिम वेरिफिकेशन के दौरान पता चला कि ‘डॉ. कृष्णा’ नाम फर्जी है और कॉल के समय उसकी लोकेशन सोलापुर की थी. इसके बाद पुलिस ने सोलापुर जाकर कृष्णा को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद वीडियो कॉल के जरिए कुड़े से कृष्णा की पहचान कराई गई.

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