– इतिहास रचने के बाद नई चुनौती : पहली महिला कुलगुरू के सामने प्र-कुलगुरू चयन की अग्निपरीक्षा
– जनवरी के अंत तक मिलेगा नागपुर विश्वविद्यालय को नया प्र-कुलगुरू, सियासी और शैक्षणिक दबाव तेज
नागपुर :- राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय को हाल ही में डॉ. मनाली क्षीरसागर नई कुलगुरू के रूप में मिली हैं और साथ ही एक स्थायी प्र-कुलगुरू (प्रो-वाइस-चांसलर) भी मिलनेवाला है. अब इस पद के चयन के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है. जानकारी के अनुसार, लगभग 29 प्रोफेसर प्रो-वाइस-चांसलर के पद में रुचि रखते हैं. इसलिए, कुलगुरू डॉ. मनाली क्षीरसागर के सामने प्र-कुलगुरू के चयन में बड़ी चुनौती होगी. आचार संहिता लागू होने के कारण विश्वविद्यालय को जनवरी के अंतिम सप्ताह तक नए प्र-कुलगुरू मिलेंगे. ऐसे संकेत कुलगुरू ने दिए है.
डॉ. मनाली क्षीरसागर नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरू चुनी गईं. वह नागपुर विश्वविद्यालय के 1०2 साल के इतिहास में पहली महिला कुलगुरू बनी हैं. विश्वविद्यालय के नियमित कुलगुरू को प्र-कुलगुरू का नाम तय करने का अधिकार है. कुलगुरू प्र-कुलगुरू के पद के लिए अपनी पसंद के कुछ व्यक्तियों के नाम रा’यपाल को भेजते हैं. रा’यपाल इसे मंजूरी देते हैं. नियमित डीन का चयन भी कुलगुरू द्वारा ही किया जाता है. हालांकि, डॉ. चौधरी के निलंबन और मृत्यु के बाद से विश्वविद्यालय में कोई नियमित कुलगुरू नहीं था, इसलिए सभी पद प्रभारी अधिकारियों के पास थे. डॉ. क्षीरसागर केचयन के साथ, अब एक नियमित प्र-कुलगुरू और डीन उपलब्ध होंगे. शिक्षा मंच का नागपुर विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारियों पर दबदबा है.
प्र-कुलगुरू पद पर किसे मिलेगी कुलगुरू की मुहर?
पूर्व कुलगुरू स्व. डॉ. चौधरी, शिक्षण मंच से थे. उनके बाद के सभी प्र-कुलगुरू भी उनसे जुड़े रहे. इस वर्ष भी प्र-कुलगुरू का पद मंच से ही पाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, पता चला है कि उम्मीदवारों की भारी संख्या के कारण कुलगुरू भी दुविधा में हैं.








